छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने अब तक संस्थानों के खिलाफ जांच लगभग पूरी कर ली है। कुल 83 मुकदमों में से एक मुकदमा हरिद्वार और दो देहरादून में लंबित हैं। अब विभिन्न राज्यों के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी है। इनके खिलाफ 63 मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी को कुल 16 इंस्पेक्टर मिल चुके हैं। जल्द ही बड़ी कार्रवाइयां देखने को मिल सकती हैं।
वर्ष 2018 से मामले की जांच करते हुए एसआईटी ने 51 मुकदमे हरिद्वार और 32 देहरादून में दर्ज किए थे। इनमें अब तक सरकारी अधिकारियों समेत कुल 53 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी के मुताबिक अब देहरादून में दो मुकदमे बचे हैं, जिनमें कार्रवाई होनी है। जबकि, हरिद्वार में यह संख्या एक है। अब तक कई अधिकारी और शिक्षण संस्थान के मालिकान गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट भी गए हैं।
एसआईटी के अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा आदि राज्यों के 22 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 38 मुकदमे हरिद्वार और 25 मुकदमे देहरादून में दर्ज हैं। इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन नियमानुसार भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी ही कर सकता है। लिहाजा, अब आठ हरिद्वार और आठ इंस्पेक्टर देहरादून में मिल गए हैं।
शासन से भी ली जाएगी अनुमति
अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से भी मंजूरी ली जाएगी। इसके लिए एसआईटी विभिन्न राज्यों के शासन को अपने शासन के माध्यम से संपर्क करेगी। ताकि, आरोपी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
करीब 200 करोड़ का है घोटाला
घोटाला जब सामने आया था उस वक्त लगभग 500 करोड़ रुपये के गबन की बात की जा रही थी, लेकिन अभी तक सभी मुकदमों की जांच में यह रकम करीब 200 करोड़ रुपये के आसपास है। हालांकि, एसआईटी ने इसका अभी पूरा आकलन नहीं किया है। यह रकम इससे ज्यादा भी हो सकती है।
ये है कार्रवाई
कुल मुकदमे संस्थानों के खिलाफ - 51(हरिद्वार) व 32(देहरादून)
गिरफ्तार आरोपी- 48 (शिक्षण संस्थानों के मालिकान) और 05 (सरकारी अधिकारी)
स्टे प्राप्त आरोपी- 94
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुकदमे- 38 (हरिद्वार) व 25(देहरादून)
जांच पूरी- 50 हरिद्वार के और 30 देहरादून के मुकदमे