दूसरी ओर, प्रदेशभर में तमाम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां प्लास्टिक कचरे की डंपिंग साइट बनी हुई हैं। पर्यावरण के लिए नुकसानदायक इन साइट को लेकर भी यूसैक ने काम शुरू कर दिया है। उच्च विभेदी उपग्रह आंकड़ों का उपयोग करके राज्य के विभिन्न जिलों में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग क्षेत्रों की मैपिंग की जा रही है। उनका मानचित्र तैयार किया जा रहा है।
एआई संचालित होगा मानचित्रण
यूसैक की ओर से हाई रेजोल्यूशन सैटेलाइट डाटा का इस्तेमाल करके सतत नगरीय नियोजन के लिए शहरी हरित क्षेत्रों का एआई संचालित मानचित्रण किया जाएगा। इसी आधार पर पहले फेज में अनुश्रवण भी किया जाएगा। मकसद ये है कि असल में शहरी हरित क्षेत्रों में क्या बदलाव आ रहा है, यह एआई से पता चल सकेगा।