Uttarakhand Sanskrit University
जांच रिपोर्ट में सामने आई ये गड़बड़ी
प्रोफेसर के लिए परास्नातक कक्षाओं में दस वर्ष का पढ़ाने का अनुभव न होना, किसी शोधार्थी का मार्गदर्शन नहीं करना, एक भी शोधपत्र किसी प्रसिद्ध जर्नल में प्रकाशित नहीं होना और शिक्षा शास्त्र विषय में 50 प्रतिशत की बजाए 45.5 फीसदी अंक होना आदि गड़बड़ी प्रो. बलोदी के दस्तावेजों में पाई गई है।
विभागाध्यक्ष से कार्यवाहक कुलपति तक रहे प्रो. बलोदी
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रो. मोहन चंद बलोदी शिक्षा शात्र के विभागाध्यक्ष से लेकर कार्यवाहक कुलपति, कुलसचिव, परिसर निदेशक सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहकर कार्य कर चुके थे। प्रो. बलोदी 16 दिसंबर 2010 को पहली बार उत्तराखंड संस्कृत विवि के प्रभारी कुलसचिव बने, दूसरी बार जुलाई 2011, तीसरी बार जनवरी 2013 और चौथी बार मार्च 2014 में विवि के कुलसचिव बने। इस बीच प्रोफेसर बलोदी 29 अक्तूबर 2012 से 16 जनवरी 2013 तक विवि के कार्यवाहक कुलपति भी रहे। विवि में कुलसचिव रहते हुए उन्हें उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव का भी अतिरिक्त पदभार दिया गया था। साथ ही वह अपनी नियुक्ति से शिक्षा शास्त्र (बीएड) विभाग के अध्यक्ष भी बने रहे। अब जांच के बाद उनके दस्तावेजों में पाई गई भारी गड़बड़ी के चलते उनकी नियुक्ति प्रक्रियाओं को ही रद्द कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार प्रोफेसर पद के लिए मोहनचंद बलोदी की न्यूनतम योग्यता नहीं पाई गई है। जिस पर कार्यपरिषद की बैठक में सर्वसम्मति से उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है। इस संबंध में उन्होंने नोटिस भी जारी कर दिया है।
- गिरीश कुमार अवस्थी, कुलसचिव उत्तराखंड संस्कृत विवि।