यह है प्रकरण
जिस स्थल पर सैन्यधाम का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है उसके रास्ते में निजी व्यक्ति की भूमि आ रही है। जो इसके बदले किसी अन्य स्थान पर भूमि की मांग कर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब खुद इन लोगों को समझाने का प्रयास किया तो अधिकारी भी हैरान रह गए। कुछ अधिकारियों का कहना था कि यह प्रकरण मंत्री के स्तर से सुलझा लिया जाना चाहिए था। हैरानी की बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री को इसके लिए यहां आना पड़ा। उधर विभागीय सूत्रों का यह भी कहना है कि इस पूरे प्रकरण में कुछ भूमाफिया को भी लाभ दिए जाने की तैयारी है।
सैन्यधाम के लिए भूमि का मामला सुलझाए बिना कर लिया गया स्थल का चयन
सैन्यधाम के रास्ते का मुख्यमंत्री के निर्देश बाद भी अब तक पेच नहीं सुलझा। मंगलवार को शासन और प्रशासन के अधिकारी पूरे दिन इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे, लेकिन इसे कुछ आपत्तियों के बाद लौटा दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि सैन्यधाम के लिए तीन से चार जगह से रास्ते का सुझाव दिया गया है। हालांकि, सभी जगहों से कुछ लोगों की भूमि आड़े आ रही है। रास्ते के लिए पूरे दिन रिपोर्ट बनाने के बाद अधिकारियों ने इस पर कुछ आपत्ति लगाकर इसे लौटा दिया है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक राजस्व विभाग की ओर से सैन्यधाम के लिए 15 फिट और 60 फिट चौड़ाई के अलग-अलग रास्ते सुझाए गए हैं। इन रास्तों पर निजी लोगों की करीब दस बीघा से अधिक भूमि आड़े आ रही है। जिन लोगों की भूमि आड़े आ रही है, उनकी बात मनवाने के लिए अधिकारियों पर जबरदस्त दबाव है।
रास्ते के मामले को सुलझाने के लिए जिलाधिकारी से समन्वय किया जा रहा है। इस संबंध में कोई न कोई हल निकाल लिया जाएगा।
- एल फैनई, प्रमुख सचिव सैनिक कल्याण