शासन स्तर पर कोई कार्रवाई न होने पर बुधवार को ही उन्होंने डाक के माध्यम से मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (कार्मिक एवं सचिवालय प्रशासन), प्रमुख सचिव (न्याय) को लीगल नोटिस भेज दिया है। नोटिस में चंद्र बहादुर बनाम उत्तराखंड सरकार मामले में उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख है, जिसमें पूर्व में हुई डीपीसी के नतीजों को सीलबंद लिफाफे में रखने को कहा गया था।
नोटिस में ज्ञानचंद बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य के मामले में हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लेख है। नोटिस में कहा गया कि पदोन्नति में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा गया है। न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक उन्होंने पदोन्नति पर रोक लगाने की मांग की है। ऐसा न होने पर उन्होंने इसे न्यायालय की अवमानना का मामला माना है।
उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद शासन ने पदोन्नति आदेश जारी कर अदालत की अवमानना की है। 10 जनवरी को हाईकोर्ट खुलेगा। तब तक शासन ने पदोन्नति आदेश पर रोक नहीं लगाई तो फेडरेशन कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेगा।