नदियों से सुरक्षित दूरी पर निर्माण करें
जीएसआई के पूर्व अपर महानिदेशक त्रिभुवन सिंह पांगती कहते हैं कि गदेरों के प्रवाह स्थल में कोई व्यवधान हुआ तो वह रास्ता बदल लेती है। लेकिन, वह कभी न कभी पुराने रास्ते पर आती है। ऐसे में नदियों, गदेरों से सुरक्षित दूरी पर कोई निर्माण करना चाहिए। यह बात हमारे पूर्वज जानते थे। उन्होंने नदी से दूरी पर मकान बनाए। कई बार लगता है कि नदी का जल स्तर कम हो गया, यह वह सिकुड़ गई तो उसके पास निर्माण किया जा सकता है, ऐसे विचार से बचने की जरूरत है। अगर नदी में पानी बढ़ेगा? तो वह कहां पर जाएगा, वह अपने प्राकृतिक रास्ते को लेते हुए आगे बढ़ेगा।
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भागीरथी नदी का बहाव दांयी तरफ हो गया
अगस्त में आई आपदा में भागीरथी नदी के बहाव में बदलाव हुआ। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय राज कहते हैं कि मलबे के कारण भागीरथी नदी के पानी का बहाव जो कि बीच और बाएं की तरफ रहता था वह दाहिने तरफ हो गया। इसी हर्षिल में दिखाई दिया। ऐसे में कटाव को रोकने के लिए सुरक्षा स्ट्रक्चर बनाए जाने की योजना है। वहीं, वाडिया संस्थानों के वैज्ञानिकों के अनुसार तेलगाड गदेरे के मलबे से भागीरथी नदी की भूआकृति में बदलाव तक हुआ।