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ढाई लाख वाउचरों में छुपा है करोड़ों के चावल घोटाले का राज, खंगालने में छूट रहे जांच कमेटी के पसीने

Tue, 14 May 2019 10:01 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में एसआईटी जांच में सामने आए करीब 600 करोड़ रुपये के चावल घोटाले की वित्तीय जांच में अभी सारे साक्ष्यों की पुष्टि नहीं हो पाई है। स्पेशल ऑडिट में जुटाए गए साक्ष्यों की पुष्टि करने के लिए सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने जो पांच सदस्यीय समिति बनाई है, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ढाई लाख वाउचरों को खंगालना है। सूत्रों की मानें तो इन ढाई लाख वाउचरों में ही चावल घोटाले का राज छुपा है। 

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खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने किसानों को किए गए भुगतान की पुष्टि के लिए जो अभिलेख उपलब्ध कराए हैं, उनकी पुष्टि को लेकर वित्त विभाग की अभी कई शंकाएं हैं। इसलिए उसने पांच सदस्यीय समिति को वाउचर और अन्य अभिलेखों का गहन परीक्षण कर यह पता लगाने का जिम्मा दिया है कि वास्तव में कितनी राशि की अनियमितता हुई।

लेकिन वाउचरों को खंगालने और अभिलेखों का परीक्षण करने में समिति के पसीने छूट रहे हैं। समिति को मई माह पहले हफ्ते तक अपनी रिपोर्ट दे देनी थी, लेकिन अभी उसका काफी काम बाकी है और अब शासन उसकी समयसीमा को और बढ़ाने पर विचार कर रहा है। समिति को जसपुर, बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता, काशीपुर, रुद्रपुर, सितारगंज और खटीमा मंडी समिति के अभिलेखों और वाउचरों की जांच करनी है। 

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स्वप्रमाणित वाउचर साक्ष्य नहीं

किसानों से धान की खरीद की पुष्टि के लिए आढ़तियों ने जो फार्म (वाउचर) की स्वप्रमाणित छाया प्रतियां उपलब्ध कराई हैं, उसे ही साक्ष्य माना है। लेकिन ये फार्म दरअसल, आढ़तियों द्वारा बनाया गया विक्रेता के लिए वाउचर है, जिसमें कृषि उत्पादन का नाम और किस्म, मात्रा, दर, विक्रेता को भुगतान की धनराशि एवं आढ़तियों द्वारा मंडी समिति को भुगतान की गई धनराशि का ब्योरा है। इस फार्म से उन कथित किसानों की पहचान नहीं की जा सकती है, जिनकों आढ़तियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य का कथित रूप से भुगतान दिखाया है। 

निदेशालय ने दिया नोटबंदी में नकद भुगतान का हवाला
विशेष ऑडिट के प्राथमिक ड्राफ्ट पर ऑडिट निदेशालय से शासन को जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें यह उल्लेख भी किया गया है कि खरीफ सत्र के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत आढ़तियों के माध्यम से धान का क्रय नकद हुआ और वह नोटबंदी का समय था। हालांकि निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट में धनराशि का हवाला नहीं दिया। उधर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी ये दावा कर रहे हैं कि विभागीय स्तर पर चावल खरीद का आनलाइन भुगतान हुआ। उसकी मानें तो आढ़तियों ने किसानों से जो धान खरीदा, उसका उन्होंने नकद भुगतान किया। इसका विभाग से कोई लेना देना नहीं है।
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