किसानों से धान की खरीद की पुष्टि के लिए आढ़तियों ने जो फार्म (वाउचर) की स्वप्रमाणित छाया प्रतियां उपलब्ध कराई हैं, उसे ही साक्ष्य माना है। लेकिन ये फार्म दरअसल, आढ़तियों द्वारा बनाया गया विक्रेता के लिए वाउचर है, जिसमें कृषि उत्पादन का नाम और किस्म, मात्रा, दर, विक्रेता को भुगतान की धनराशि एवं आढ़तियों द्वारा मंडी समिति को भुगतान की गई धनराशि का ब्योरा है। इस फार्म से उन कथित किसानों की पहचान नहीं की जा सकती है, जिनकों आढ़तियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य का कथित रूप से भुगतान दिखाया है।
निदेशालय ने दिया नोटबंदी में नकद भुगतान का हवाला
विशेष ऑडिट के प्राथमिक ड्राफ्ट पर ऑडिट निदेशालय से शासन को जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें यह उल्लेख भी किया गया है कि खरीफ सत्र के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत आढ़तियों के माध्यम से धान का क्रय नकद हुआ और वह नोटबंदी का समय था। हालांकि निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट में धनराशि का हवाला नहीं दिया। उधर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी ये दावा कर रहे हैं कि विभागीय स्तर पर चावल खरीद का आनलाइन भुगतान हुआ। उसकी मानें तो आढ़तियों ने किसानों से जो धान खरीदा, उसका उन्होंने नकद भुगतान किया। इसका विभाग से कोई लेना देना नहीं है।