वित्त ने इस आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि दोहरा लाभ पाने वालों के वेतन या सेवानिवृत्ति के देयकों से वसूली की जाए। वित्त का अनुमान है कि करीब 50 हजार कर्मचारी इस जद में आ रहे हैं। यह मामला 2011 के शासनादेश के कारण सामने आया है लिहाजा दोहरा लाभ पाने वाले कर्मचारियों को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विरोध जताने की तैयारी में कर्मचारी
वित्त के इस आदेश के बाद से कर्मचारी संगठनों में उबाल है। उनका कहना है कि एक व्यवस्था लागू होनी चाहिए यह सही है, लेकिन सरकार को इतने साल बाद कोरोना काल में ही यह याद क्यों आ रहा है। कर्मचारियों को इससे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
एक नजर में
- 08 मार्च, 2011 को सरकार ने आदेश जारी किया था कि कर्मचारियों को 10, 16 और 26 वर्ष में संतोषजनक सेवा पर पदोन्नत वेतनमान दे दिया जाए। इसी के तहत यह साफ कहा गया कि कर्मचारियों को दोहरा लाभ नहीं दिया जाए। अगर स्टाफिंग पैटर्न लागू है तो एसीपी का लाभ नहीं मिलेगा।
- एक जनवरी, 2017 से प्रदेेश में नई व्यवस्था लागू हुई। संशोधित एसीपी के जरिये 10, 20 और 30वें वर्ष एसीपी की व्यवस्था की गई।
- अब सामने आया है कि कई संवर्गों में दोहरा लाभ लिया जा रहा है।