उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन में 65 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारी वीके सिन्हा को परियोजना सलाहकार बनाए जाने के मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई के बाद निदेशक स्वजल और अपर सचिव पेयजल को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार अधिवक्ता हर्ष निधि शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पेयजल एवं स्वच्छता मिशन में परियोजना सलाहकार के पद पर वीके सिन्हा की पुन: नियुक्ति को चुनौती देते हुए कहा कि इनकी नियुक्ति 22 फरवरी 2013 को जारी शासनादेश का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया कि इस शासनादेश के तहत 65 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकारी की पुनर्नियुक्ति पर प्रतिबंध है। याचिका में आरोप लगाया गया कि यह नियुक्ति मनमानीपूर्ण और एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
वीके सिन्हा को 2009 में प्रोजेक्ट कंसलटेंट के पद पर रखा गया था। इसके पश्चात प्रतिवर्ष उनकी नियुक्ति बढ़ाई जाती रही और 65 वर्ष की आयु सीमा के उपरांत भी उन्हें पुन: नियुक्ति दी गई जो गलत है। शासनादेश में 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति की नियुक्ति पर प्रतिबंध है और इससे अधिक आयु के व्यक्ति की नियुक्ति केवल उसी दशा में होगी जब अभ्यर्थी उपलब्ध न हो लेकिन इस प्रकरण में अन्य अभ्यर्थियों को तलाशने का कोई प्रयास ही नहीं किया गया और वीके सिन्हा के प्रार्थनापत्र पर स्वजल निदेशक की आख्या पर अपर सचिव पेयजल के आदेश से ही 72 वर्ष की आयु होने पर भी वीके सिन्हा की नियुक्ति कर दी गई। याचिका में कहा गया कि इस संबंध में शासनादेश में वर्णित प्रावधानों के अनुरूप विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री का अनुमोदन भी नहीं लिया गया।