तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ हिमांशु बागरी ने बताया कि जिस क्षेत्र में तेंदुए का आतंक ज्यादा होगा, वहां टीम पहले उसे बचाएगी। उसके बाद चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की अनुमति मिलने पर रेडियो कॉलर लगाया जाएगा, जिससे तेंदुए की गतिविधियों और उसके व्यवहार पर अध्ययन किया जा सके।
जंगल से शहर या गांव में घुसने वाले तेंदुओं को पकड़ने में वन विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। वन विभाग के ऑपरेशन के दौरान कभी तेंदुआ उग्र होकर भीड़ पर भी हमला कर देता है। अब जीपीएस से जुड़ा रेडियो कॉलर लगाने से यह पता चलेगा कि तेंदुआ कहां घूम रहा है।