बोर्ड खत्म हुआ तो सामने आया रिकॉर्ड का अंतर
मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद अब सभी संबंधित संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता हासिल करनी है, नियमानुसार पूर्व में मान्यता प्राप्त मदरसों को भी नए शैक्षिक सत्र में धार्मिक शिक्षा संचालित करने के लिए प्राधिकरण से मान्यता लेनी है, लेकिन मान्यता तो दूर मदरसों की संख्या को लेकर भी शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में अंतर है। वहीं, 452 में से अब तक 33 मदरसों को ही मान्यता मिली है।
मान्यता के लिए आगे नहीं आ रहे मदरसे
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता को लेकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी बड़ी संख्या में मदरसों के मान्यता प्रक्रिया में आगे नहीं आने की बात सामने आई है। हरिद्वार में ही बड़ी संख्या में मदरसे संचालित होने का दावा किया गया, लेकिन शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत कम संस्थानों ने मान्यता के लिए आवेदन किया। यही हाल देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले का है।
मदरसा बोर्ड के मुताबिक राज्य में 452 मदरसे हैं, शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में इनकी संख्या कम है। विभाग का कहना है कि जिन मदरसों को मिड डे मील दिया जा रहा था, उसके पास केवल उसकी जानकारी है। मदरसों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रकरण की जांच करवाई जाएगी।
- डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण