एसई के रूचि न लेने से 12 जनवरी 2020 तक टेंडर प्रक्रिया लटकी रही। 13 जनवरी को प्रभारी एसई मनोहर सिंह ने शुद्धि पत्र जारी कर आखिरी तिथि 19 मार्च 2020 तय की। हार्ड कापी 26 मार्च तक जमा करानी थी, लेकिन 18 मार्च को ही प्रभारी एसई ने फिर शुद्धि पत्र जारी कर अपरिहार्य कारण बताकर अंतिम तिथि 26 मार्च कर दी। इस बीच लॉकडाउन की वजह से टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकी और मोटर मार्ग का निर्माण लटक गया। टेंडर प्रक्रिया में इस हीलाहवाली से ठेकेदार को आर्बिट्रेशन से अवार्ड प्राप्त हुआ। साथ ही मोटर मार्ग का निर्माण नहीं हो सका।
मामला नोटिस में आने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभागीय सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देश के तहत सचिव लोनिवि आरके सुधांशु ने दोनों इंजीनियरों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
नवंबर 2019 में बन कर होना था तैयार
टनकपुर जौलजीवी मोटरमार्ग करीब 25 किलोमीटर लंबा है। इस मोटर मार्ग को नवंबर 2019 में बन कर तैयार हो जाना चाहिए था, लेकिन न्यायिक विवाद और इंजीनियरों की हीलाहवाली के कारण मार्ग अब तक नहीं बन सका है।