फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: मंत्री आर्य, पांडे के बाद विधायक राजेश शुक्ला अफसरशाही के रवैये से आहत, छलक रहा दर्द

Tue, 07 Jul 2020 04:24 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
विज्ञापन
ऑफिसर - फोटो : demo pics
विज्ञापन

अफसरशाही के खिलाफ शिक्षा मंत्री की कड़ी नाराजगी जाहिर होने के बाद अब किच्छा विधायक राजेश शुक्ला को अफसरों के रवैये को लेकर धरने पर बैठना पड़ा। एक मरीज की मौत के बाद गुस्साए शुक्ला गुस्से में सीएमओ से यहां तक कह गए कि मैं शर्मिंदा हूं कि सिस्टम फेल है। 

विज्ञापन


अधिकारियों की अनदेखी को लेकर सत्ता पक्ष के विधायक की नाराजगी कोई पहली दफा नहीं है। एक जुलाई को पंतनगर विवि में ठेका श्रमिकों को नौकरी से हटाने के विरोध में विधायक शुक्ला धरने पर बैठ गए थे। इधर अपने पुराने गनर हटाने से नाराज विधायक राजकुमार ठुकराल भी 21 दिनों से बिना गनर के भ्रमण पर जा रहे हैं। एसएसपी की ओर से दिए गए दो गनर उनको रास नहीं आ रहे हैं। 

दरअसल अफसरशाही को लेकर पिछले कुछ समय से विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के विधायकों की नाराजगी भी सामने आ रही है। जिले की बात करें तो कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के साथ ही विधायक राजेश शुक्ला, राजकुमार ठुकराल और जसपुर विधायक आदेश चौहान अफसरों के रवैये को लेकर सार्वजनिक रुप से नाराजगी जता चुके हैं। विधायक राजकुमार ठुकराल अपने दो पुराने गनर हटाने से नाराज हैं। एसएसपी की ओर से दिए गए गनर उनके आवास पर ड्यूटी पर रोजाना आते हैं लेकिन नाराज विधायक 21 दिनों से नए गनरों को अपने साथ नहीं ले जा रहे हैं। 
विज्ञापन


किच्छा में चीनी मिल के अधिकारियों को लताड़ लगाने का विधायक शुक्ला का वीडिया वायरल हो चुका है लेकिन अब वह अफसरों के रवैये के विरोध में धरने पर बैठने लगे हैं। एक जुलाई को शुक्ला पंतनगर विवि में ठेका श्रमिकों की नौकरी बहाली को लेकर धरने पर बैठे। इधर, सोमवार को मरीज की मौत को लेकर वह जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। उनको समझाने गए एसीएमओ और सीएमओ को उनका गुस्सा झेलना पड़ा। विधायक बोले कि मुझे अफसोस है कि मैं डॉक्टर नहीं बन पाया।

मैं पंतनगर से एमएससी कर सकता था तो डॉक्टरी की पढ़ाई भी कर सकता था। हमने आपके सिस्टम में क्या कमी की, क्या नहीं दिया। आप कह रहे हैं अस्पताल में प्लेटलेट्स नहीं हैं। प्लेटलेट्स मंगाई नहीं जा सकती थी क्या? अगर नहीं आ सकती तो क्यों खोलकर बैठे हो बंद कर दो अस्पताल को। मरीज के लिए एक एंबुलेंस नहीं कर पाते हैं आप। एंबुलेंस क्यों नहीं दी, मैं देता क्या यहां आकर। विधायक को चपरासी समझ रखा है क्या आपने। दिमाग खराब हो गए हैं। गरीब मर गया तो मर गया। अमूमन शांत रहने वाले विधायक के तेवर देख अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए थे। 

नगर निगम के पार्षद दे चुके सामूहिक इस्तीफा

अफसरों के खिलाफ नाराजगी नगर निगम में भी फूट चुकी है। कुछ समय पहले ही नगर आयुक्त के रवैये से नाराज भाजपा और कांग्रेसी पार्षद सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था। नगर आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शनों का सिलसिला भी चला था। लेकिन भाजपा हाईकमान के हस्तक्षेप और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक से वार्ता के बाद भाजपा पार्षदों ने इस्तीफा वापस ले लिया था। अब भी नाराज भाजपा के पार्षद नगर निगम में नहीं जा रहे हैं। भाजपा पार्षद सुशील चौहान ने बताया कि 30 जुलाई तक नगर आयुक्त का तबादला करने का आश्वासन मिला है। अगर तबादला नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू करेंगे। 

एक व्यक्ति मरीज को लेकर किच्छा, रुद्रपुर और हल्द्वानी घूमता रहा और उनके कहने के बावजूद मरीज को इलाज नहीं मिलने पर मरीज की मौत हो गई। रात 12 बजे से सुबह तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के नंबर बंद थे। एक गरीब बिना इलाज के मर गया और उन्होंने खराब व्यवस्था पर आक्रोश जताते हुए धरना दिया। कुछ अधिकारी काम नहीं करना चाहते हैं।
- राजेश शुक्ला, विधायक किच्छा

21 दिन से वह बिना गनरों के साथ कार्यक्रमों में शिरकत कर रहे हैं। उनके पुराने गनर बिना कारण बताए हटा दिए। एसएसपी ने दो गनर दिए हैं, वे घर पर आते हैं लेकिन वह उनको अपनी सुरक्षा में नहीं ले जाते हैं।
- राजकुमार ठुकराल, विधायक रुद्रपुर

लगातार कह रहे हैं कि अफसरशाही हावी है। अब मंत्री और विधायक भी कह रहे हैं। लोकतंत्र में चुने जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं हो रहा है। विधायक ने धरना देकर अपनी सरकार पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है।
- तिलकराज बेहड़, पूर्व मंत्री

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें