फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंडः अब EVM खोलेगी राज, किसके सिर सजेगा ताज

Fri, 17 Feb 2017 03:18 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
ईवीएम जमा कराई गईं। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
मतदाताओं ने अगले पांच साल के लिए सत्ता की बागडोर किसे सौंपनी यह तय कर दिया। 11 मार्च को ईवीएम यह राज खोलेगी कि सत्ता का ताज किसके सिर पर सजेगा।
विज्ञापन


मतदाताओं की चुप्पी से यह साफ नहीं है कि जीत मोदी मंत्र की होगी या फिर हरीश तंत्र की, लेकिन दोनों ही दलों में सीएम की संभावनाओं को देखा जाए तो कांग्रेस की सरकार बनने पर हरीश रावत ही दोबारा सीएम पद के दावेदार दिख रहे हैं।

उधर, बिना चेहरे के उतरी भाजपा ने बीते चालीस दिनों के प्रचार में यह संकेत तो दिये हैं कि सीएम की रेस में सतपाल महाराज और त्रिवेंद्र सिंह रावत रेस में सबसे आगे हैं।
विज्ञापन

कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा ईवीएम मशीनों में कैद हो गई

हरीश रावत - फोटो : Self
उत्तराखंड में इस बार का चुनावी समर में प्रदेश के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा ईवीएम मशीनों में कैद हो गई है। मतगणना के बाद न केवल यह साफ होगा कि भाजपा, कांग्रेस और बसपा सहित निर्दलियों और अन्य दलों की स्थिति क्या रहेगी बल्कि कई क्षत्रपों का भविष्य  भी तय होना है।

ये नेता चुनाव जीतने की स्थिति में या तो मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे या फिर अपने दलों में उनके वजूद में इजाफा होगा। ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है, जिनके लिए यह चुनाव सियासी जीवन मरण का सवाल है।

सीएम हरीश रावत निर्विवाद रूप से कांग्रेस के सीएम पद का चेहरा हैं। रावत मैदानी क्षेत्र की किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे हैं। हरीश रावत ने चुनाव में सारी ताकत झोंक दी। सियासत के हर फ्रंट पर वही भाजपा से टक्कर लेते नजर आए, लेकिन सीएम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए उनकी राह आसान नहीं है।

सत्ता में होने के चलते एंटी इंकम्बेंसी फेक्टर के साथ भाजपा के जोरदार स्टार प्रचार उनके लिए कड़ी चुनौती है। अगर स्थितियां किन्हीं कारणों से रावत के समीकरण बिगड़ते हैं तो इंदिरा हृदेश और प्रीतम सिंह का नाम भी सीएम की रेस में माना जा सकता है। हालांकि इंदिरा अगर चुनाव हार गयी तो यह उनका आखिरी चुनावी रण साबित होगा।
विज्ञापन

अघोषित चेहरे सियासी चर्चाओं का हिस्सा बने

ajay bhatt - फोटो : amar ujala
उधर एंटी इंकम्बेंसी फेक्टर के साथ मोदी मैजिक के भरोसे उतरी भाजपा ने सीएम को कोई चेहरा तो घोषित नहीं किया, लेकिन कई अघोषित चेहरे सियासी चर्चाओं का हिस्सा बन रहे हैं।

पार्टी ने जिस तरह सतपाल महाराज को पोस्टर ब्वाय बनाया और पूर्व सीएम और सांसदों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया उससे संकेत मिलते हैं कि वह पार्टी के बहुमत में आने के बाद सीएम की रेस में आगे रहेंगे। माना जा रहा है कि महाराज को केंद्र की राजनीति से हटा विधानसभा चुनाव में इसी के चलते उतारा गया है।

डोईवाला से भाजपा प्रत्याशी त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम भी सीएम पद के लिए खासी चर्चाओं में है। रावत को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का करीबी माना जाता है।

हालांकि प्रदेश चुनाव प्रभारी जेपी नड़्डा अजय ने रानीखेत में एक जनसभा के दौरान प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की पीठ थपथपा कर उनके भी सीएम पद के दावेदार होने के संकेत दिए थे। इसके अलावा प्रकाश पंत को भी सीएम की रेस में माना जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें