कई गुना फीस बढ़ोतरी करने वाले निजी मेडिकल कॉलेजों ने शुक्रवार को अपने कदम पीछे खींच लिए।
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने निजी मेडिकल कॉलेजों से इस मुद्दे पर बातचीत की, जिसके बाद एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नोटिस वापस लेते हुए अपीलेंट अथॉरिटी और हाईकोर्ट के फैसले तक फीस बढ़ोतरी का निर्णय रोक दिया है। हालांकि, छात्र देर रात तक धरने पर बैठे हुए थे। उधर, हिमालयन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि हम नियम के हिसाब से ही शुल्क वृद्धि करेंगे।
हाल ही में मेडिकल पीजी काउंसिलिंग से ठीक पहले निजी मेडिकल कॉलेजों को प्रदेश सरकार ने शुल्क तय करने का अधिकार दे दिया था। इसके तहत मेडिकल कॉलेजों ने जहां पीजी का शुल्क 8-10 लाख रुपये से बढ़ाकर 24-30 लाख रुपये कर दिया तो वहीं यूजी का शुल्क भी 5-6 लाख रुपये से 19-22 लाख रुपये कर दिया था।
सीएम हरीश रावत और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं भी मौके पर पहुंचे
harish rawat with protesters
- फोटो : amar ujala
एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने फीस वृद्धि के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। तीन दिन से छात्र-छात्राएं एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे हैं। बृहस्पतिवार को एबीवीपी के कार्यकर्ता सरकार के फैसले के खिलाफ छात्रों को समर्थन देने पहुंचे थे। वहीं, शुक्रवार को पूर्व सीएम हरीश रावत और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने भी मौके पर पहुंचकर छात्रों को समर्थन दिया।
उनका कहना था कि शुल्क वृद्धि छात्रों के साथ सरासर अन्याय है। उधर, सीएम त्रिवेंद्र रावत से बातचीत के बाद एसजीआरआर प्रबंधन ने फीस बढ़ाने का नोटिस वापस ले लिया। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि सत्र 2016-17 और 2017-18 की फीस मामले में पूर्व में जारी किए गए नोटिस को फिलहाल वापस ले लिया गया है। हाईकोर्ट के हाल के फैसले में अपीलेंट अथॉरिटी को आगामी छह सप्ताह में फीस निर्धारण के लिए निर्देश जारी किया गया है।
फिलहाल अपीलेंट कमेटी एवं हाईकोर्ट के निर्देशानुसार ही कॉलेज प्रबंधन फीस निर्धारण पर आगे की कार्रवाई करेगा। कॉलेज प्रबंधन ने नोटिस की प्रति छात्रों को उपलब्ध कराने के साथ ही कॉलेज नोटिस बोर्ड पर भी लगा दी है। उधर, स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी जौलीग्रांट के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि वह नियम के हिसाब से ही शुल्क बढ़ाएंगे।