उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से प्रदेश की 11 में से सात जल विद्युत परियोजनाएं ठप हो गई है। पिछले दो दिनों से केवल तीन से चार परियोजनाएं ही चल पा रही है, जिससे बिजली उत्पादन 16 मिलियन यूनिट से कम होकर छह मिलियन यूनिट पर सिमट कर रह गया है।
इससे प्रदेश की बिजली आपूर्ति पूरी तरह गड़बड़ा गई है। करोड़ों रुपये की रोजाना बिजली खरीदने के बावजूद रोजाना घंटों कटौती करनी पड़ रही है, जिससे पूरी राज्य सरकार की फजीहत हो रही है।
बृहस्पतिवार को ऊर्जा भवन में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक एके जौहरी और जल विद्युत निगम के डायरेक्टर आपरेशन पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि तेज बरसात से नदियों में बड़े पैमाने पर गाद (खर, पतवार, लकड़ी) आने से सात जल विद्युत परियोजनाओं को बंद करना पड़ा है। दो दिनों से केवल चार परियोजनाएं ही चल पा रही है।
मौसम जब तक नहीं खुलता तब तक ऐसी ही स्थिति बने रहने की संभावना है। जौहरी ने बताया कि उत्पादन बंद होने से बिजली संकट खड़ा हो गया है। इससे निपटने के लिए अतिरिक्त बिजली की खरीददारी की जा रही है। इसके बावजूद छोटे और बड़े शहरों में कटौती करनी पड़ रही है।
ये परियोजनाएं चल रही
98 मेगावाट की चीला, 20 मेगावाट की खटीमा, 22 मेगावाट की कुल्हाल और सात मेगावाट की मोहम्मदपुर
ये परियोजनाएं बंद है
185 मेगावाट की छिबरो, 82 मेगावाट की खोदरी, 30 मेगावाट की ढकरानी, 46 मेगावाट की ढालीपुर, 99 मेगावाट की मनेरी भाली फेज -1, 246 मेगावाट की मेनरी भाली फेज-2, 20 मेगावाट की पथरी और 198 मेगावाट की कालागढ़।
17 बार बंद हो चुकी विद्युत परियोजनाएं
उत्तराखंड भारी बारिश से एक माह आठ दिन में 17 बार जल विद्युत परियोजनाएं बंद हो चुकी है। इस दौरान आपूर्ति को सामान्य करने के लिए ऊर्जा निगम की ओर से 118 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी जा चुकी है। उत्तराखंड बनने के बाद से लेकर आज तक ऐसी नौबत कभी भी नहीं आई है। बारिश के दौरान न तो इतने बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को बंद करना पड़ा है और नही बिजली खरीदने की जरूरत पड़ी है।