ऊर्जा निगम के अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से निजी कार्य करवा रहे हैं। मना करने पर स्थानांतरण कर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। अधिकारियों के उत्पीड़न से परेशान एक लाइन श्रमिक तो नौकरी छोड़ने को मजबूर है। उसने उपखंड अधिकारी को पत्र भेजकर कार्यरत मुक्त करने की मांग की है।
बसंत कौशिक के मुताबिक वह ऊर्जा निगम में पिछले दस वर्षो से लाइन श्रमिक का कार्य कर रहा है। निगम की ओर से उसका स्थानांतरण कौलागढ़ कर दिया है। इससे पहले उसका स्थानांतरण वसंत विहार कर दिया गया था। यह इसलिए किया गया कि उसने एक अधिशासी अभियंता का निजी कार्य करने से इंकार कर दिया था। अब उसका स्थानांतरण कौलागढ़ इसलिए किया गया कि उसने एक चीफ इंजीनियर के घर में काम करने से मना कर दिया।
उसका आरोप है कि उपखंड अधिकारी उन पर दबाव बना रहे हैं कि वह चीफ इंजीनियर के घर में कार्य करें। साथ ही कौशिक ने चीफ इंजीनियर की पत्नी पर भी धमकी देने और घर में काम करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
कौशिक ने कहा कि वह अधिकारियों के उत्पीड़न से परेशान हो चुका है। ऐसे माहौल में वह नौकरी नहीं कर सकता है। इस संबंध में उसने उपखंड अधिकारी को पत्र लिखकर कार्यमुक्त करने की मांग की है। उधर इस मामले में यूपीसीएल के प्रवक्ता चीफ इंजीनियर एके सिंह ने कहा कि कर्मचारी के आरोप निराधार हैं। निगम में किसी भी कर्मचारी का उत्पीड़न नहीं किया जा रहा है।