कैबिनेट मंत्री बनने की दौड़ में वरिष्ठ विधायकों की लंबी कतार है। कैबिनेट में गढ़वाल से चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग का प्रतिनिधित्व नहीं है। चमोली से बदरीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट मंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। देहरादून जिले से त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुन्ना सिंह चौहान, हरबंस कपूर, गणेश जोशी और प्रेमचंद अग्रवाल वरिष्ठ विधायक हैं।
इनमें से त्रिवेंद्र मुख्यमंत्री रहे और अग्रवाल विधानसभा अध्यक्ष हैं। हरिद्वार से मदन कौशिक की कैबिनेट में रहे। पौड़ी से सतपाल महाराज, डॉ.हरक सिंह रावत व डॉ.धनसिंह रावत त्रिवेंद्र कैबिनेट में मंत्री रहे। टिहरी से सुबोध उनियाल को कैबिनेट में जगह मिली। कुमाऊं में पिथौरागढ़ से प्रकाश पंत कैबिनेट मंत्री बने। उनके निधन के बाद से कैबिनेट का पद नहीं भरा गया। उनकी जगह विधायक बनीं उनकी पत्नी चंद्रा पंत का नाम मंत्री पद की दावेदारी में शुमार है।
बागेश्वर से पूर्व कैबिनेट मंत्री बलवंत सिंह भौर्याल की चर्चा रही है। डीडीहाट से बिशन सिंह चुफाल के नाम की चर्चा है। सोमेश्वर से रेखा आर्या राज्यमंत्री रही हैं। यूएसनगर में बाजपुर से यशपाल आर्य, गदरपुर से अरविंद पांडेय मंत्री रहे हैं। इस जिले में काशीपुर से वरिष्ठ विधायक हरभजन सिंह चीमा का नाम भी दावेदारों में माना जा रहा है। खटीमा से वरिष्ठ विधायक पुष्कर सिंह धामी का नाम भी कैबिनेट मंत्री के दावेदारों में गिना जा रहा है।
सवाल : कौन हटेगा, कौन बनेगा मंत्री
कैबिनेट गठन को लेकर हवाओं में अब यह सवाल तैर रहे हैं कि कौन हटेगा और कौन मंत्री बनेगा? ये सवाल पुराने मंत्रियों को बदले जाने, नए चेहरो को शामिल करने से जुड़े हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा के टिकट से चुनाव जीते विधायकों में सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य त्रिवेंद्र कैबिनेट में रहे। उनके अलावा भाजपा मूल के मदन कौशिक, डॉ.धनसिंह रावत व अरविंद पांडेय मंत्री रहे। अब प्रश्न यही है कि इनमें से कितने मंत्रियों की तीरथ कैबिनेट में वापसी होगी?