पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दो दिन पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की तारीफ करने के साथ कांग्रेस के उज्याड़ू बल्दों (कांग्रेस से भाजपा में गए नौ विधायक) की रार छेड़कर प्रदेश की राजनीति में एक नया मुद्दा दे दिया है। उनके इस बयान पर मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई तो हरीश रावत ने भी अपने अंदाज में उनकी बातों का जवाब दिया।
हरीश रावत ने कहा कि रावतों की क्रॉस फायरिंग में मुझे मत घसीटो। भाजपा ने अपने यहां ऐसे बहुत से लोग इकट्ठा कर रखे हैं, जो एक दूसरे का सिर फोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। मंत्री की ओर से हरीश रावत का नाम लिए जाने के सवाल पर हरीश ने कहा कि त्रिपाठी आयोग का जब कार्यकाल समाप्त हो गया, उस वक्त उन्होंने औपचारिक रूप से मुझे रिपोर्ट सौंपी। मैं उस वक्त एक्स में भर्ती था।
जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। इतना समय नहीं था कि मैं इन चीजों पर विचार कर पाता कि किसको जेल भेजना है और किसका क्या करना है। जब मैं स्वस्थ्य हो गया तो मैंने फाइल का अध्ययन किया। तब मैंने विचार करने के बाद पाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्री और सचिव पर इस मामले में भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता है।
उस वक्त मेरे पास एक यही फाइल नहीं, बल्कि सात-आठ फाइलें और आईं थीं। इनमें से दो-तीन फाइलों में उन लोगों की संलिप्तता उजागर हो रही थी, जो मेरे धुर विरोधी रहे हैं। लेकिन मैंने उन फाइलों में भी यही लिखा कि प्रमाण पुष्ट नहीं हैं। सिर्फ इसलिए उन्हें जेल नहीं भेजा जा सकता था कि वह मेरे विरोधी हैं। कांग्रेस की कभी ऐसी नीति नहीं रही है। भाजपा होती तो जरूर एक-दो को जेल भेज देती।