विकास की नई इबारत लिखने के लिए ये हो सकते हैं रास्ते
- निजी निवेश को बढ़ावा देकर नई अवस्थापना का विकास, ताकि रोजगार के साधन भी जुटें
- अनुपयोगी परिसंपत्तियों को बेचकर जुटाई गई पूंजी से नई परिसंपत्तियां बनाई जाए
- परिसंपत्तियों को निजी क्षेत्र की भागीदारी यानी पीपीपी मोड पर उपयोगी बनाने और उससे राजस्व कमाने की योजना
अवस्थापना बोर्ड के जरिये आगे बढ़ेगी सरकार
अपनी इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए सरकार उत्तराखंड निवेश एवं अवस्थापना विकास बोर्ड बनाने जा रही है। मसूरी चिंतन शिविर में यह फैसला हुआ था, जिस पर कैबिनेट अपनी सैद्धांतिक सहमति दे चुकी है। सरकार इसके लिए एक अधिनियम बना रही है ताकि बोर्ड के पास कानूनी अधिकार हों।
परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के संबंध में मसूरी चिंतन शिविर में निर्णय हुआ था। इस संभावना पर विचार हो रहा है। मैकेंजी ग्लोबल अपनी रिपोर्ट देगा। - आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, नियोजन
ऐसी परिसंपत्तियां जो किसी काम की नहीं है, उसे बेचे जाने में कोई दिक्कत नहीं। आम तौर पर सरकारें ऐसा करने से हिचकती हैं। लेकिन पहली कोशिश निजी क्षेत्र की भागीदारी से परिसंपत्तियों को पूंजी जुटाने के योग्य बनाने की होने चाहिए। - इंदु कुमार पांडेय, पूर्व मुख्य सचिव व आर्थिक मामलों के जानकार
ये भी पढ़ें...Uttarakhand Budget 2023: जन सुझावों से जनहित का बजट बनाने को आज संवाद, सीएम और वित्त मंत्री करेंगे चर्चा
परिसंपत्तियों को बेचना समस्या का समाधान नहीं बल्कि इसको निमंत्रण देना है। सरकार को चाहिए कि परिसंपत्तियों को नए स्वरूप में विकसित करके इससे पूंजी जुटाई जा सकती है। ऐसे प्रयोगों से दीर्घकालिक चोट पहुंचेगी। -हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री