जीरो टॉलरेंस नीति का दावा करने वाली मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार इस पर काफी हद तक अमल करती भी नजर आई। एनएच-74 घोटाले की जांच कराई। खास बात यह है कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब आईएएस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। उनके इस फैसले पर उन्हें काफी वाहवाही भी मिली।
उत्तराखंड: असंतुष्टों की गोलबंदी ने खिसका दी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र की कुर्सी, विधायक ही नहीं मंत्री भी थे नाराज
यह ड्रीम प्रोजेक्ट हुए सफल
- त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार में सहारनपुर रोड पर डाटकाली सुरंग का निर्माण पूरा हुआ। यहां लोगों को जाम से राहत मिली।
- जनवरी 2006 से भागीरथी नदी पर जिस डोबरा चांठी पुल के बनने का इंतजार किया जा रहा था, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के कार्यकाल में वह सपना पूरा हो गया।
- मुनि की रेती और स्वर्गाश्रम को जोड़ने वाले जानकी सेतु का निर्माण वर्ष 2006 से पूरा नहीं हो पाया था। त्रिवेंद्र सरकार में यह निर्माण पूरा हो गया।
- देहरादून से हरिद्वार के बीच के जो फ्लाईओवर ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गए थे, उनमें त्रिवेंद्र कार्यकाल में नई जान आ गई। देखते ही देखते फ्लाईओवर निर्माण ने रफ्तार पकड़ी और कार्य पूरे होकर कई फ्लाईओवर संचालित भी हो गए।
त्रिवेंद्र के संदेशों में अटी पड़ी है कुंभनगरी
हरिद्वार में महाकुंभ के प्रचार- प्रसार पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया गया था। पूरा मेला क्षेत्र निवर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के फोटो वाले होर्डिंग, बैनर और पोस्टर से अटा पड़ा है। अब नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी के साथ इन कुंभ संदेशों को भी बदलना का होगा। इन संदेशों को बदलने में एक बार फिर बजट खर्च किया जाएगा।
एक अप्रैल से महाकुंभ की अधिसूचना जारी हो जाएगी। ऐसे में कुंभ के आयोजन को अब बस 21 दिन शेष बने हैं। सरकार ने कुंभ के प्रचार-प्रसार और कोविड नियमों के लिए श्रद्धालुओं को जागरूक के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया था।
यदि मेला क्षेत्र में नजर दौड़ाएं तो एक छोर से दूसरे छोर तक त्रिवेंद्र सिंह रावत के फोटो वाले कुंभ निमंत्रण और कोविड सुरक्षा के जागरूकता संदेश लिखे होर्डिंग, बैनर और पोस्टर नजर आएंगे। मायापुर के पास महाकुंभ का ईश्वरीय निमंत्रण देती निवर्तमान मुख्यमंत्री की बड़ी पेंटिंग लगी है। अब जब नए मुख्यमंत्री कुर्सी संभालेंगे ने तो इन होर्डिंग, बैनरों और पोस्टरों को बदलने का काम शुरू होगा।