मुख्यमंत्री के पद से त्रिवेंद्र सिंह रावत की विदाई को कांग्रेस ने नाकाफी करार दिया है। कांग्रेस ने पूरी सरकार को ही बर्खास्त करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत को विदा कर भाजपा प्रदेश में अपनी चार साल की नाकामी को छुुपाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा में मचे सियासी घमासान पर कांग्रेस लगातार निगाह रखे हुए है। त्रिवेंद के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे पर कांग्रेस नेता खासे मुखर रहे। कांग्रेस ने माना कि भाजपा ने डैमेज कंट्रोल के लिए त्रिवेंद्र से इस्तीफा दिलवाया। कांग्रेस ने अब अपनी रणनीति में इस तथ्य को हमला करने का मुख्य आधार बनाया है।
पार्टी के रणनीतिकारों की मानें तो पार्टी यह महसूस कर रही है कि प्रदेश में भाजपा अपना जनाधार खो रही है। इसी को देखते हुए कांग्रेस ने अपने कील कांटों को दुरुस्त करने का काम भी शुरू कर दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने तो खुलकर चुनाव में स्थानीय चेहरे की पैरवी शुरू कर दी थी।
ऐसे में त्रिवेंद्र को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद कांग्रेस ने एक कदम आगे बढ़कर मोर्चा संभाला है। कांग्रेस 18 मार्च को प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने पर सरकार के खिलाफ आरोप पत्र भी लेकर आ रही है। इसके साथ ही 14 मार्च को कांग्रेस श्रीनगर में मंडल स्तर पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी कर रही है। अब कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रही है।
सिर्फ मुख्यमंत्री को बदलने से बात नहीं बनने वाली। भाजपा हमेशा से ही ऐसा करती आई है। इससे भाजपा सरकार की चार साल की नाकामी नहीं छिपने वाली। कांग्रेस मांग करती है कि इस भाजपा सरकार को ही भंग किया जाए और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगे।
- देवेंद्र यादव, प्रदेश प्रभारी, कांग्रेस
यह नॉन परफॉर्मेंस की सरकार रही है। कर्मचारियों में असंतोष, सांसद, विधायक नाराज, लोग त्रस्त। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को मंडल घोषित किया और किसी से बात तक नहीं की। साफ है त्रिवेंद्र को तो हटना ही था। हमारा तो सीधा सवाल है, इतनी देर क्यों की और चार साल तक प्रदेश के लोगों को क्यों रुलाया। साफ है मात्र नेतृत्व परिवर्तन से बात बनने वाली नहीं है।
- इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
भारी बहुमत के बाद भी प्रदेश की खराब होती आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई, कोरोना संक्रमण को रोकने में विफलता, भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए। अब भाजपा त्रिवेंद्र सिंह रावत को बदल कर इन सब पर्दा डालने की कोशिश में है। कांग्रेस को यह मंजूर नहीं है। सरकार ही बर्खास्त होनी चाहिए।
- प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा के डबल इंजन की कलई खुल गई है। सीएम की विदाई के दो कारण हो सकते हैं। एक तो चार राज्यों में चुनाव में उतर रही भाजपा भ्रष्टाचार से घबरा गई या फिर उसे डर था कि भराड़ीसैंण में 2016 न दोहरा दिया जाए।
- किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
उत्तराखंड क्रांति दल ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे पर कहा कि देर हुई पर त्रिवेंद्र के इस्तीफे का निर्णय सही है। गैरसैंण में आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज वाले दिन ही उनसे इस्तीफा ले लेना चाहिए था। दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि गैरसैंण को कमिश्नरी नहीं बल्कि पहले जिला और स्थायी राजधानी घोषित किया जाना चाहिए।
उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने से क्षेत्र का भला होने वाला नहीं हैं। पौड़ी भी मंडल मुख्यालय है, लेकिन वहां के सभी काम देहरादून कैंप कार्यालय से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैरसैंण में सड़क की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर जिस तरह से लाठियां बरसाई गईं।
उसने 1994 में उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार द्वारा आंदोलनकारियों पर की गई बर्बरता की याद दिला दी। उन्होंने कहा कि सड़क की मांग करना जनता का मौलिक अधिकार है। उन पर लाठियां बरसाने का नतीजा है कि आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है।