मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकार किया कि उत्तराखंड की राजनीति का मिजाज टी-20 जैसा हो चला है। जबकि इस छोटे राज्य में ‘टेस्ट मैच’ खेले जाने की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, चिकित्सा व पर्वतीय खेती बाड़ी के क्षेत्र में काम करना बेहद जरूरी है। दुर्भाग्य से इन तीनों ही क्षेत्रों को केंद्र में रखकर काम नहीं हुआ। लेकिन नए साल में इन पर फोकस किया जाएगा।
सीएम आवास पर आयोजित भोज के दौरान अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि संवेदी क्षेत्र (इको सेंसिटिव) जोन गंभीर मसला है। इस पर राज्य और पर्यावरणविदों की अपनी अपनी राय है। लेकिन इस मामले में राज्य के पास व्यापक अधिकार होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि खासतौर पर पहाड़ के लिए शिक्षा, चिकित्सा और खेती-किसानी पर फोकस होना चाहिए था जो कि नहीं हुआ। लेकिन नए वर्ष में हमारी सरकार के एजेंडे में ये तीनों सेक्टर है। राज्य की राजनीति पर भी उन्होंने चुटकी ली और कहा कि प्रदेश की सियासत का मिजाज 20-20 हो चुका है जो राज्य के लिए घातक है।
प्रदेश को टेस्ट मैच की तर्ज वाली राजनीतिक की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य बनने के बाद लोगों को जो मिला वह उनसे संभला नहीं। और रही रोजगार देने की बात तो इतनी बड़ी संख्या में सरकार रोजगार नहीं दे सकती, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर रहेगा।