राष्ट्रपति चुनाव में उत्तराखंड के विधायकों की भी अहम भूमिका रहने वाली है। चुनाव को लेकर बीजेपी उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का नाम उत्तराखंड के नेताओं के लिए वैसे भी अजीज ही रहा है। तो जानते हैं कि वे कैसे इसमें अहम योगदान निभा सकते हैं।
चुनाव की दृष्टि से हिमालयी राज्यों की रैंकिंग में उत्तराखंड दूसरे नंबर पर है। 72 अंकों के साथ जम्मू और कश्मीर पहले स्थान पर है जबकि उत्तराखंड के एक विधायक की हैसियत 64 अंकों की है। हिमाचल और उत्तर पूरब के सभी राज्यों के विधायक हैसियत के मामले में उत्तराखंड से पीछे हैं।
बता दें कि उत्तराखंड को भारत के निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम भेज दिया है। यदि आम सहमति नहीं बनती है तो आगामी 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट पड़ेंगे।
इस चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के सदस्यों के अलावा सभी राज्यों की विधानसभा के सदस्य मतदान करेंगे। एक खास फार्मूले के आधार पर एमपी और एमएलए के वोट की हैसियत का आकलन किया गया है।
फार्मूले के हिसाब से उत्तराखंड के एक एमएलए के हैसियत 64 अंकों की है। हैसियत के मामले में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में दूसरे स्थान पर है। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के एक एमएलए की वेल्यू 51 अंकों की है।
वेल्यू निकालने का ये फार्मूला
सबसे कम और सबसे ज्यादा
सिक्किम के एक एमएलए की हैसियत महज सात अंकों की है। पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश के एक एमएलए की वेल्यू 208 तय की गई है जो देश में सबसे अधिक है। एक एमपी के वोट की वेल्यू 708 अंक है।
1971 की जनसंख्या है आधार
सदस्यों के वोट की वेल्यू निकालने का आधार 1971 की जनसंख्या है। तब 70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड की आबादी 44 लाख 91 हजार 239 थी। राज्य के कुल वोटों की वेल्यू 4480 है।
वेल्यू निकालने का ये फार्मूला
संसद सदस्य के वोट की वेल्यू निकालने के लिए राज्यों की विधानसभा सदस्यों की कुल वेल्यू में राज्य सभा और लोक सभा के सदस्यों की कुल संख्या 776 से भाग देने पर निकाली गई है। ये संख्या 708 है। सभी राज्यों के विस सदस्यों की कुल वेल्यू 5,49,495 है।
राष्ट्रपति चुनाव में 4120 एमएलए और 776 एमपी वोटर हैं, जिनके वोटों की कुल वेल्यू 10 लाख 98 हजार 903 वोट है।
राष्ट्रपति चुनाव को लेकर निर्वाचन अधिकारी के जो निर्धारित प्रारूप पर दिशा-निर्देश आए थे, उनकी सूचना समाचार पत्रों के माध्यम से प्रकाशित कराकर माननीय सदस्यों को उपलब्ध करा दी गई है। समय-समय पर जैसे-जैसे दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उनके अनुरूप प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।
-जगदीश चंद्र, सहायक निर्वाचन अधिकारी, राष्ट्रपति चुनाव