लोकसभा चुनाव के नतीजे को लेकर गरम उत्तराखंड की राजनीति में बृहस्पतिवार को अफवाहों व अटकलों का तड़का लगता रहा।
बृहस्पतिवार को अचानक बुलाकर सात कांग्रेस विधायकों को सभा सचिव पद की शपथ दिलाने के बाद दो अन्य विधायकों को भी पद और मान सम्मान दिए जाने की अटकलें लगती रहीं।
दोहपर मुख्यमंत्री की राज्यपाल से हुई शिष्टाचार भेंट ने अटकलों को पंख लगा दिए। शाम तक सरकार में शामिल दो मंत्रियों को हटाने की खबरों ने जोर पकड़ा। वहीं भाजपा की अपने विधायकों को देहरादून बुलाने खबर ने भी खूब परेशान किया।
नैथानी बने सत्ता परिवर्तन के केंद्र बिंदु
सत्ताधारी कांग्रेस अपने विधायकों व गुटों को संतुष्ट करने में जुटी है। सतपाल महाराज के जाने के बाद से ही अमृता रावत के जाने या फिर उन्हें हटाए जाने की खबरें लगातार आ रही हैं।
हालांकि अधिकारिक तौर पर अमृता रावत खुद को कांग्रेस में बता रही हैं और मुख्यमंत्री की ओर से भी ऐसे कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमृता रावत दोपहर में पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक ले रही थीं।
नेतृत्व परिवर्तन से लेकर सत्ता परिवर्तन की खबरों के केंद्र बिंदु मंत्री प्रसाद नैथानी बने हैं। ऐसे में बृहस्पतिवार देर शाम इनकी विदाई को लेकर भी अफवाह उड़ती रही।
हालांकि मुख्यमंत्री कैंप की ओर से स्पष्ट किया गया कि नैथानी पूरी तरह से सरकार के साथ हैं।
भाजपा विधायकों की बैठक की खबर से हडकंप
दोहपर को भाजपा कैंप से जैसे ही यह खबर आई कि पार्टी ने सभी विधायकों को देहरादून तलब किया है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा में अपने दूत और मीडिया से पूछताछ शुरू कर दी।
भाजपाई इसे अपनी सरकार के गठन से जोड़त रहे तो कांग्रेसी इसे तोड़फोड़ से जोड़ते रहे।
उनका तर्क था कि भाजपा के चार विधायक कांग्रेस में आने को तैयार बैठे हैं। जिसमें एक वह भी हैं जो मुख्यमंत्री के लिए अपनी सीट खाली करने को तैयार हैं। हालांकि कुमाऊं के कुछ भाजपा विधायक देहरादून में ही थे।