उत्तराखंड में पुलिस विभाग की एक शर्मनाक करतूत सामने आई है। पुलिस ने 2006 में शहीद हुए लेफ्टिनेंट के नाम पर समन भेज दिया। अब परिजनों ने इस मामले में रक्षा मंत्रालय से गुहार लगाई है।
कोटद्वार में ग्रास्टनगंज निवासी नरेशचंद्र जोशी और उनकी पत्नी लता जोशी उनके शहीद बेटे गौरव जोशी के नाम से समन मिलने से पुलिस पर भड़के हुए हैं।
परिजनों का कहना है कि उनका बेटा गौरव जोशी एक मार्च, 2006 को फौज की विशेष ट्रेनिंग के दौरान शहीद हो गया था।
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में लगाएंगे गुहार
summon to martyr lieutenant
- फोटो : amar ujala
पुलिस द्वारा उसके नाम से चार्जशीट दाखिल करना शर्मनाक है। कहा कि वह निर्धारित तिथि पर कोर्ट में शहीद बेटे का फोटो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सेना के सभी अभिलेख प्रस्तुत करेंगे। पुलिस के खिलाफ वह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में गुहार लगाएंगे।
कोटद्वार के लकड़ी पड़ाव में 29 सितंबर, 2015 को दो पक्षों में झगड़े के बाद शहर में हुए बवाल और तोड़फोड़ के मामले की जांच पूरी कर कोतवाली पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। पुलिस की जांच के आधार पर कोर्ट की ओर से 27 आरोपियों को समन भेजे गए हैं।
कोतवाली पुलिस ने घटना में सात लोगों को नामजद करते हुए डेढ़ से दो सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ शहर में तोड़फोड़, बवाल, उन्माद फैलाने समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में पुलिस ने वीडियो फुटेज खंगालने के बाद 29 लोगों की पहचान की थी।
'निर्दोष लोगों को फंसाने का षडयंत्र'
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अन्य लोगों की पहचान न हो पाने के कारण उन्हें आरोपी नहीं बनाया जा सका। पुलिस ने जांच पूरी कर पिछले माह आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया, जिसके आधार पर कोर्ट से उन्हें निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने के लिए समन जारी कर दिए गए हैं। पुलिस के अनुसार 27 लोगों को समन तामील करा दिए गए हैं।
लैंसडौन के विधायक दलीप रावत और कोटद्वार के पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत ने पुलिस के मुकदमे को फर्जी और सत्तारुढ़ दल के दबाव में उठाया गया कदम बताया।
कहा कि तोड़फोड़ के नाम पर निर्दोष लोगों को फंसाने का षडयंत्र रचा गया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने ग्रास्टनगंज निवासी एक शहीद लेफ्टिनेंट गौरव जोशी को भी समन भिजवा दिया है, जो शर्मनाक है।