उत्तराखंड के मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस कांस्टेबल को रिवाइज ग्रेड-पे के आधार पर एरियर देना संभव नहीं है।
पुराने ग्रेड-पे के आधार पर छठवें वेतन आयोग का लाभ जनवरी 2016 से दिया जा चुका है। उन्होंने एरियर नहीं देने की बात तो कही, लेकिन पिछले डेढ़ साल में दी गई 19 सुविधाओं की सूची भी सामने रखी।
पिछले दिनों पुलिस कांस्टेबलों द्वारा काली पट्टी बांधकर विरोध-प्रदर्शन करने से हुई बदनामी का हैंग-ओवर बना हुआ है। परिस्थितियां पीएचक्यू के नियंत्रण से बाहर होती देख मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने स्वयं कमान संभाल ली।
अचानक बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव ने कहा कि हर पुलिसकर्मी की समस्या सरकार की प्राथमिकताओं में है, लेकिन राज्य में ऐसे कई कैडर हैं, जिन्हें सेटलमेंट की डेट से ही एरियर मिला। पुलिस कांस्टेबल की मांग पूरी करने के लिए ही 110 करोड़ रुपए चाहिए।
बाकी नौ कैडर भी जोड़ लो तो सभी की मांग पूरी करने के लिए 2200 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। राजकोष की स्थिति ऐसी नहीं है कि यह मांग पूरी की जा सके। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश इसी महीने ऑनलाइन होने वाली है, ऐसे में वेतन या एरियर से जुड़े मामले में निर्णय लेना सैद्धांतिक रूप से ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि पुलिस कांस्टेबल को सबसे ज्यादा वेतन देने वाले तीन प्रदेशों में उत्तराखंड भी शामिल है। इसके अलावा दिल्ली और यूपी ने ही इतना वेतन दिया है। सरकार ने भत्ते बढ़ाने जैसी 19 सुविधाएं भी दी हैं, उन्हें भी देखा जाना चाहिए। यदि कोई दिक्कत है तो किसी भी कांस्टेबल के लिए विभाग और सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं।