केदारनाथ की सुरक्षित यात्रा के दो ही विकल्प
जानकारों का कहना है कि केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए दो ही विकल्प हैं। पहला पैदल यात्रा का है, लेकिन यह बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए दुष्कर है। दूसरा विकल्प रोपवे या केबिल कार का है, जो बच्चों, वृद्धों, जवानों व दिव्यांगों सभी की यात्रा को सुगम बनाने वाला है।
रोपवे के जल्द बनकर तैयार हो जाने की चाहत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास करने के बाद राज्य सरकार की यह कोशिश होगी कि रोपवे या केबिल कार का प्रोजेक्ट कम से कम एक से दो साल के भीतर बनकर तैयार हो जाए।
2026 तक बनाए जाने का लक्ष्य है
सोनप्रयाग से बनाए जाने वाले केदारनाथ रोपवे या केबिल कार परियोजना का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लि. को दिया गया है। एजेंसी परियोजना की डीपीआर तैयार कर रही है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि परियोजना को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। करीब 9.70 किमी लंबी इस परियोजना पर 1268 करोड़ खर्च होंगे।
रोपवे बनने के बाद कम हो जाएगा हेली सेवाओं का क्रेज
जानकारों का मानना है कि रोपवे बनने के बाद हेली सेवा से केदारनाथ की यात्रा करने का क्रेज कम हो जाएगा। सुरक्षित और किफायती होने की वजह से यात्री रोपवे या केबिल कार के माध्यम से यात्रा करना ज्यादा पसंद करेंगे। ऐसी स्थिति में हेली सेवाएं सीमित हो जाएंगी।