फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड पीसीएस-जे 2019: अल्मोड़ा की प्रिया शाह ने पाई आठवीं रैंक, रह चुकी हैं एलएलबी टॉपर

Tue, 22 Dec 2020 11:57 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
विज्ञापन
प्रिया शाह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

अल्मोड़ा की प्रिया शाह जज बन गई हैं। उत्तराखंड पीसीएसजे में उन्होंने आठवीं रैंक हासिल की है। उनके जज बनने से क्षेत्र में खुशी की लहर है। उत्तराखंड पीसीएसजे सिविल जज जूनियर डिवीजन में आठवीं रैंक प्राप्त करने वाली अल्मोड़ा के डुबकिया मोहल्ला निवासी प्रिया शाह के पिता स्व. अनुज कुमार अधिवक्ता थे।

विज्ञापन


उनकी माता किरन शाह गृहिणी हैं और चेली ऐपण संस्था से भी जुड़ी हैं। उनके दादा स्व. दिनेश चंद्र शाह वरिष्ठ अधिवक्ता थे। प्रिया ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई कुर्मांचल अकादमी अल्मोड़ा से की है।

एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से 2014 में बीकॉम करने के बाद यहीं से 2017 में उन्होंने एलएलबी में प्रवेश लिया और इस साल एलएलएम भी पूरा कर लिया है। बीकॉम और एलएलबी में टॉपर रहकर उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त किया।  2017 में ही व्यक्तिगत एमकॉम की परीक्षा में भी उन्होंने प्रदेश टॉप किया था।
विज्ञापन


उनके छोटे भाई शुभम शाह ने इसी साल दिल्ली में बीकॉम की परीक्षा पास की है। वह सीए की तैयारी कर रहे हैं। उनके चाचा स्व. डॉ. राजेश शाह प्रसिद्ध डॉक्टर थे। जबकि चाची डॉ. विनीता शाह अल्मोड़ा में सीएमओ के पद पर रह चुकी हैं।

विज्ञापन

दादाजी के वकील की बजाय कुछ बड़ा बनने की बात ने पहुंचाया इस मुकाम पर

अधिवक्ता स्व. दिनेश चंद्र शाह की पोती प्रिया आज इस मुकाम पर दादा के आशीर्वाद से पहुंची हैं। उसने बताया कि दादा की मृत्यु से कुछ समय पहले ही उन्होंने मुझसे कुछ बड़ा बनने की बात कही थी। जो बात हमेशा उनकी माता किरन शाह उन्हें याद दिलाती रही।

एलएलबी में टॉप करने और स्वर्ण पदक पाने के बाद प्रिया को हौसला मिला और पहली बार में ही उन्होंने पीसीएसजे परीक्षा में आठवीं रैक प्राप्त की। वह बहुत अधिक समय तक पढ़ाई नहीं करती थीं, बल्कि पूरे दिन में थोड़े-थोड़े समय ही पढ़ाई करती थी।

मां ने हमेशा दी हिम्मत
मां के परिश्रम से ही प्रिया आज इस ऊंचे मकाम पर पहुंची हैं। दादा और पिता की मौत के बाद माता किरन शाह ने पिता और मां दोनों की जिम्मेदारी निभाई। मां ने उसे हमेशा हिम्मत दी। प्रिया का कहना है कि परीक्षाओं के समय मां खुद भी परीक्षार्थियों की तरह जागती रहीं। कहा कि वैसे तो हर किसी ने उनकी सहायता की। कॉलेज से लेकर अल्मोड़ा के अधिवक्ताओं और अन्य प्राध्यापकों ने उन्हें सहयोग किया। लेकिन मां के परिश्रम से ही आज वह इस मुकाम पर पहुंची हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें