इस कार्य के लिए उरेडा से भी उनको सहयोग मिला था। प्रोजेक्ट में उनके करीब दो लाख रुपये खर्च हुए। गज्जे सिंह रावत कहते हैं कि पानी कभी कम, कभी ज्यादा होने से बिजली पैदा करने में थोड़ी समस्या आती है, लेकिन अपनी जरूरत के काम हो जाते हैं।
कुछ समस्याएं दूर करने की जरूरत
गज्जे सिंह बताते हैं कि बिजली कंट्रोल करने वाला उपकरण अक्सर खराब हो जाता है। इससे बिजली उत्पादन में समस्या आती है। फिलहाल इसमें कोई भी विभाग मदद नहीं कर रहा है। गज्जे सिंह रावत कहते हैं कि पहाड़ के गांवों में गाड़-गदेरे के पानी का अगर सही इस्तेमाल किया जाए तो कई गांवों का अंधेरा मिट सकता है।
इसके लिए सरकार और संबंधित विभागों को मदद के लिए आगे आना होगा। गांव की प्रधान कौशल्या रावत कहती हैं कि गज्जे सिंह रावत आज सबके लिए प्रेरणा का काम कर रहे हैं। उत्तराखंड को कभी आयुष प्रदेश तो कभी पर्यटन प्रदेश तो कभी सरकारों ने ऊर्जा प्रदेश बनाने का नारा देकर राजनीतिक रोटियां खूब सेंकी हैं।
हकीकत में यह नारा कभी धरातल पर नहीं उतर पाया, लेकिन किसान गज्जे सिंह रावत ने खुद के संसाधन से बिजली पैदा कर सरकार को आईना दिखाने का काम जरूर किया है।