लेकिन अभी पार्टी बागी प्रत्याशियों की चुनौती से निपटने की रणनीति बना रही है और उसके सामने दो जगह वोटर लिस्ट में नाम वाले प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर रोक से नई चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि अदालत के फैसले पर अमल हुआ तो संगठन के कई समर्थित प्रत्याशी दौड़ से बाहर हो जाएंगे। टिहरी जिला पंचायत में एक सीट से निर्विरोध चुनी गई एक पार्टी समर्थित प्रत्याशी का नाम निकाय की सूची में बताया जा रहा है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में पार्टी के कई ऐसे समर्थित प्रत्याशी हैं, जिनके निकाय और पंचायत की मतदाता सूचियों में नाम हैं और उन्होंने नामांकन दाखिल कर रखा है। फिलहाल कोर्ट के फैसले पर भाजपा में पूरी तरह से खामोशी है।
अब सबकी निगाहें निर्वाचन आयोग पर
अदालत का फैसला आने के बाद अब सत्तारूढ़ भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग के रुख पर लगी है। आयोग ने दो जगह मतदाता सूची में नाम वालों को मतदान करने और चुनाव लड़ने की अनुमति दे रखी है।