पंचायतों की राजनीति में दिग्गजों का सहारा मिला, तो उनकी जीवन संगिनियों का भी प्रभाव जम गया। शुरुआत भले ही दिग्गजों के मार्गदर्शन में हुई, लेकिन काम करने के अपने तरीके से उन्होंने अपनी जगह बनाई। पंचायतों की बारीकियों को समझा। फिर चाहे दीप्ति रावत हों, अंबिका सजवाण, मधु चौहान या फिर रजनी रावत। ये सभी महिला नेत्रियां जिला पंचायत अध्यक्ष पद संभाल चुकी हैं।
अपने पतियों के ऊंचे राजनीतिक नाम से हटकर इन सभी ने अपना अलग नाम बनाया है। पंचायत चुनाव के लिए सज चुके मैदान में इन महिला नेत्रियों की इस बार क्या भूमिका होगी, इस पर सबकी नजर होगी। ये महिला नेत्रियां यदि मैदान में उतरती हैं, तो मुकाबले में रंग जरूर भरेंगे। राजनीति में इनके दिग्गज पतियों की भूमिका पर भी फिर स्वाभाविक तौर पर बात होगी।
डॉ.हरक सिंह रावत-दीप्ति रावत
कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत पौड़ी जिला पंचायत की अध्यक्ष रही हैं। नब्बे के दशक से राजनीति करते आ रहे डॉ. रावत ने भाजपा, कांग्रेस में रहते हुए पंचायतों की राजनीति को बहुत करीब से समझा है। जिस पार्टी में रहे, उसके लिए पंचायत चुनाव में खूब काम किया। बहुत ज्यादा लंबा समय नहीं हुआ है, जबकि उन्होंने अपनी पत्नी को पंचायत की राजनीति में उतारा। पौड़ी जिला चूंकि रावत का गृह जिला है और वह पौड़ी, कोटद्वार जैसी इस जिले की विधानसभा सीटों से जीतते रहे हैं, ऐसे में वह दीप्ति रावत को मजबूती देने में कामयाब रहे।
शूरवीर सिंह सजवाण-अंबिका सजवाण
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण का टिहरी जिले में प्रभाव रहा है। वह देवप्रयाग, टिहरी जैसी विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं। टिहरी जिले में पंचायत की राजनीति में उनकी पत्नी अंबिका सजवाण काफी पहले से सक्रिय है। वह जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें पंचायत की राजनीति में स्थापित करने में शूरवीर सिंह सजवाण का भी अहम हाथ माना जाता है। टिहरी जिले की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले सजवाण ने अंबिका के लिए कई मौकों पर आधार तैयार किया है।
मुन्ना सिंह चौहान-मधु चौहान
भाजपा के तेजतर्रार नेता और विधायक मुन्ना सिंह चौहान देहरादून जिले में कभी चकराता, तो कभी विकासनगर सीट से विधायक रहे हैं। भाजपा के सुलझे हुए नेताओं में शुमार मुन्ना सिंह चौहान का कद बड़ा है। देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी उनकी पत्नी मधु चौहान संभाल चुकी हैं। वैसे, यह मुन्ना सिंह चौहान की ही प्रेरणा रही थी कि वह विधायक का चुनाव भी कांग्रेस के दिग्गज प्रीतम सिंह के खिलाफ लड़ी थीं, हालांकि उन्हें जीत नसीब नहीं हो पाई थी।
राजेंद्र भंडारी-रजनी भंडारी
पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी चमोली जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पंचायतों की राजनीति से ही उनका कैरियर शुरू हुआ और भाजपा-कांग्रेस दोनों सरकारों में उन्हें मंत्री बनने का मौका मिला। पंचायतों की राजनीति से साथ छूटा, तो उनकी पत्नी रजनी भंडारी ने उनकी जगह ले ली। वह चमोली जिला पंचायत की अध्यक्ष रही हैं। भंडारी की आज भी पंचायतों की राजनीति में खूब दिलचस्पी है। वह खूब भी पंचायतों की जानकारी रखते हैं और पत्नी को भी सपोर्ट करते हैं।