पंचायत जनाधिकार मंच ने पंचायत आरक्षण के प्रस्तावों पर आपत्ति दर्ज करने के लिए सिर्फ एक दिन दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। मंच के संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने सीएम को पत्र भेजा है। बिष्ट ने कहा है कि आरक्षण तय करने की प्रक्रिया को आनन फानन में निबटाया है।
सिर्फ एक दिन आपत्तियों को दर्ज कराने के लिए दिया है, जबकि सुनवाई में दो दिन लगाए हैं। इसी तरह, होना ये चाहिए था कि आरक्षण जिस तरह का प्रस्तावित किया गया है, उसके संबंध में पूर्व के चुनावों की स्थिति को भी लोगों के सामने रखा जाता। सभी प्रमुख जगहों पर पुराने आंकडे़ प्रदर्शित किए जाने चाहिए थे, ताकि लोगों को आपत्ति दर्ज करने में सहूलियत होती। मगर ऐसा नहीं किया गया है।
उन्होंने सीएम से मांग की कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए वह उचित कदम उठाएं। इस क्रम में तीन सितंबर तक आपत्तियां आमंत्रित की जानी चाहिए। दूसरी तरफ, पंचायती राज के प्रभारी सचिव डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा का कहना है कि आपत्तियों के लिए एक दिन का समय देने के पीछे समय से पंचायत चुनाव कराने का मकसद है। समयबद्घ ढंग से सारी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।