मंत्री आर्य ने सीएम से आरक्षित वर्ग के हितों के संरक्षण के मद्देनजर 28 अगस्त को कैबिनेट में लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार करने और आगामी कैबिनेट की बैठक में पुन: प्रस्ताव लाए जाने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने सीएम से आग्रह किया है कि पुनर्विचार होने तक इस संबंध में कोई शासनादेश जारी न किया जाए।
फेडरेशन ने उठाया था मंत्री से मसला
आर्य ने मुख्यमंत्री को यह पत्र उत्तराखंड एससी-एसटी इम्पलाइज फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष करम राम की शिकायत पर लिखा। फेडरेशन ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में रोस्टर की व्यवस्था उत्तरप्रदेश की भांति लागू थी। यूपी ने 13 अगस्त 2019 को सीधी भर्ती के पदों पर जो आरक्षण प्रणाली जारी की है, उसमें क्रमांक एक पर अनुसूचित जाति के पद से रोस्टर को लागू किया गया है, जबकि राज्य गठन से लेकर अब तक एससी व एसटी के पदों का बैकलाग पूर्ण नहीं हो पाया है। छोटा राज्य होने की वजह से अधिकांश विभागीय ढांचे में सीमित पद होते हैं। ऐसी स्थिति में एससी का पद छठे स्थान से प्रारंभ किए जाने से एससी व एसीट के पदों की संख्या नगण्य हो जाएगी। फेडरेशन ने मंत्री से यूपी की तर्ज पर ही आरक्षण रोस्टर लागू करने की मांग उठाई।
उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि कैबिनेट मंत्री के दबाव में आकर आरक्षण रोस्टर के संबंध में लिए गए कैबिनेट के फैसले को बदला गया तो कर्मचारी बिना नोटिस दिए प्रदेशव्यापी आंदोलन पर उतर आएंगे। फेडरेशन ने कैबिनेट के फैसले का समर्थन किया और उसका तत्काल शासनादेश जारी करने की मांग की है। इस संबंध में फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी और प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसांई ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा है कि कैबिनेट ने राजकीय सेवाओं, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों व शिक्षण संस्थाओं में सीधी भर्ती के लिए विभिन्न श्रेणियों में लागू आरक्षण व्यवस्था के तहत निर्धारित प्रतिशत के आधार पर समान अवसर प्रदान करते हुए रोस्टर का पुनर्निर्धारण किया है। इसके विपरीत उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला है कि एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन ने परिवहन मंत्री पर दबाव बनाते हुए कैबिनेट के फैसले को बदलवाने का प्रयास किया जा रहा है।
कैबिनेट में लिए गए फैसले का शासनादेश जारी न करने का अनुरोध तक किया गया है। दोनों नेताओं ने सीएम से अपील की है कि वे कार्मिक विभाग को कैबिनेट के फैसले का शासनादेश तत्काल जारी करने के निर्देश दें। इसके साथ ही फेडरेशन ने आगाह किया है कि परिवहन मंत्री के दबाव में मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसले पर किसी भी प्रकार कोई पुनर्विचार या संशोधन किया गया तो फेडरेशन सामान्य और ओबीसी वर्ग के सदस्यों की भावनाओं और सेवा हितों की रक्षा के लिए बिना किसी नोटिस के प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने को स्वतंत्र होगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और शासन की होगी।