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पंचायत चुनाव 2019: जारी हुई आरक्षण की अनंतिम सूची, सीएम बोले-एक्ट में संशोधन की गुंजाइश नहीं  

Wed, 28 Aug 2019 08:13 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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तीन बार टलने के बाद आखिरकार मंगलवार को पंचायत आरक्षण की अनंतिम सूची का प्रकाशन हरिद्वार को छोड़कर बाकी सभी जिलों में कर दिया गया। इस पर अब आपत्तियां आमंत्रित करने से लेकर उनके निस्तारण की कार्रवाई होगी।

 

तय कार्यक्रम के अनुसार, 28 अगस्त को आपत्तियां मांगी गई है। फिर दो दिन इनका निस्तारण होगा। 31 अगस्त को आरक्षण सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद, जिलों से निदेशालय और वहां से आरक्षण की अंतिम सूची शासन को भेजी जाएगी।

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 सरकार के स्तर पर एक सितंबर को आरक्षण की सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को दे दी जाएगी। पूरे प्रदेश के 12 जिलों में 66 हजार से ज्यादा पदों के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया शुरू होने को चुनाव की तैयारी तेज होने से जोड़ा जा रहा है। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बीच 30 नवंबर 2019 तक त्रिस्तरीय पंचायतों में चुनाव कराए जाने हैं।

पंचायत राज एक्ट में संशोधन की गुंजाइश नहीं

पंचायत राज एक्ट में दो बच्चों और शैक्षिक योग्यता की व्यवस्था में सरकार संशोधन की गुंजाइश नहीं देखती। भले ही विपक्ष इस पर हल्ला मचा रहा हो। सरकार ने मंगलवार को पूरी ताकत से इस बात को सामने रखा। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इन संशोधनों को पंचायतों में बेहतर व्यवस्था के लिए जरूरी बताया। पंचायत राज मंत्री अरविंद पांडेय ने साफ कहा कि इन दो अहम व्यवस्था पर अध्यादेश की कोई सूरत नहीं है।
 
दूसरी तरफ सहकारिता समिति के सदस्यों की चुनाव में भागीदारी के सवाल पर जरूर सरकार का नरम रुख है। सरकार इस मामले को मामूली त्रुटि मान रही है। हालांकि आंशिक संशोधन के लिए भी उसे अध्यादेश के रास्ते से होकर गुजरना पडे़गा।

पंचायत राज एक्ट 2016 में सरकार ने इस बार दो बच्चों की शर्त और विभिन्न पदों के लिए शैक्षिक योग्यता को लागू कर दिया है। इस बार पंचायत चुनाव भी सरकार नई व्यवस्था के तहत ही कराने जा रही है। पंचायत संगठन दो बच्चों की शर्त लागू करते हुए 300 दिन का ग्रेस पीरियड न देने पर एतराज जता रहे हैं। शैक्षिक योग्यता पर ओबीसी के लिए साफ साफ व्यवस्था न करने पर भी वह सवाल उठा रहे हैं।
 
जिस वक्त यह संशोधन हुआ, तब सरकार ने इशारा किया था कि वह जरूरी हुआ तो अध्यादेश के जरिये खामियों को दूर करेगी। मगर अब सरकार दो टूक कह रही है कि इन मामलों में अध्यादेश लाने की कोई गुंजाइश नहीं है।
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इस तरह का है सहकारिता सदस्यों से जुड़ा मसला

पंचायती राज संशोधन एक्ट 2019 में त्रुटिवश एक जगह पर सहकारिता कमेटियों के सदस्यों के चुनाव न लड़ने का जिक्र किया है, जबकि सरकार का आशय सहकारिता कमेटी के मैनेजमेंट बोर्ड के पदाधिकारियों से हैं। सरकार पंचायत चुनाव में उनके लड़ने पर पाबंदी चाहती है।
 
मगर एक त्रुटि की वजह से सहकारिता समितियों से किसी भी रूप में जुडे़ लोग चुनाव के अयोग्य हो रहे हैं। इसमें संशोधन किया जाना है। पंचायत राज विभाग के एक अफसर के मुताबिक, यह बहुत बड़ी त्रुटि नहीं है। हालांकि यह किसी प्रशासनिक आदेश के चलते नहीं हुई है, इसलिए संशोधन की बात आगे बढ़ती है, तो फिर अध्यादेश लाना ही पडे़गा।

कांग्रेस को पंचायत के आरक्षण से कोई मतलब नहीं है। वह खुद उससे बाहर हो रहे हैं। जनसंख्या नियंत्रण एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इंदिरा जी के समय शुरू हुआ था। आज अगर हमने उसके लिए ठोस पहल की है और अगर जनप्रतिनिधि इसका पालन न करें, तो जनता भी उनका सहयोग नहीं करेगी। अगर हम जनसंख्या नियंत्रण करते हैं, तो उन्हें उसमें सहयोग करना चाहिए। 
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, सीएम, उत्तराखंड

कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए इस तरह की बातें कर रही है। अन्यथा, दो बच्चों और शैक्षिक योग्यता की व्यवस्था पंचायतों में बेहतरीन माहौल बनाने के लिहाज से ऐतिहासिक कदम है। इस पर अध्यादेश लाकर संशोधन की कोई सूरत नहीं है। सहकारिता सदस्यों के चुनाव लड़ने के संबंध में अभी कुछ तय नहीं है। हालांकि हम सोचते हैं कि सहकारिता सदस्य होने मात्र से चुनाव के अयोग्य किसी को नहीं किया जाना चाहिए।
-अरविंद पांडेय, मंत्री, पंचायती राज
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