इस दौरान पुलिस ने प्रशिक्षु शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया, जिससे सैकड़ों प्रशिक्षु शिक्षक घायल हो गए। लाठीचार्ज के बाद पुलिस-प्रशासन एवं प्रशिक्षु शिक्षकों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाने की तैयारी थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया कि शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा।
मौखिक समझौते के बाद प्रशिक्षु शिक्षकों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन बाद में गुपचुप तरीके से पुलिस ने 17 नामजद और सौ अज्ञात प्रशिक्षु शिक्षकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया।
प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री ने कहा कि अब छह साल बाद कोर्ट से संबंधित शिक्षकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। कुछ शिक्षकों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिससे शिक्षकों में भय व्याप्त है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए। संगठन के प्रदेश महामंत्री ने बताया कि इस मामले को लेकर संगठन मुख्यमंत्री से मिलने के बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे से भी मिला।
दोनों की ओर से आश्वासन दिया गया है कि शिक्षकों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को शीघ्र वापस लिया जाएगा। सीएम से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में अल्मोड़ा के जिलाध्यक्ष किशोर जोशी, मनोज कंडवाल, मनोज बिष्ट, प्रकाश जोशी आदि शामिल रहे।