इस दौरान पंचायत सदस्यों का अपहरण भी किया जाता है जिससे प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ती है। पुलिस राजनीतिक दबाव में मामले को दबा देती है। याचिकाकर्ता की ओर से चुनाव व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार को दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि पंचायत राज एक्ट में चुनाव में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं। कोर्ट ने इसकी जानकारी 19 सितंबर तक कोर्ट में शपथपत्र के माध्यम से पेश करने को कहा है।