त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए घमासान छिड़ने की शुरुआत हो गई है। दावेदार अपनी तैयारी है, लेकिन इससे पहले जो मैदान सजा है, उससे हर पक्ष के लिए बेशुमार चुनौतियां साफ दिखाई दे रही हैं। हाईकोर्ट चार महीने के भीतर पंचायत चुनाव चाहता है और 12 जिलों में 67 हजार पदों के चुनाव से जुड़ी व्यवस्था बहुत आसान नहीं है। बहरहाल, शासन ने तेजी दिखाते हुए आरक्षण की प्रक्रिया को मंगलवार से शुरू कर दिया है। जिलाधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई के लिए चिट्ठी भेज दी गई है।
दूसरी तरफ, दो बच्चों की शर्त और शैक्षिक योग्यता की व्यवस्था लागू होने के बाद तमाम लोगों के अरमान मिट्टी में मिल गए हैं। ऐसे लोग अब नैनीताल हाईकोर्ट तक दौड़ लगाने की तैयारी में है। पंचायत संगठनों के प्रतिनिधियों ने तो नैनीताल में दस्तक दे भी दी है। इन स्थितियों के बीच, पंचायत चुनाव जब होंगे, तब होंगे, लेकिन इससे पहले एक अलग तरह का घमासान छिड़ गया है। जिसमें एक तरफ चुनाव कराने की प्रशासनिक तैयारी हैं, तो दूसरी तरफ पंचायतीराज एक्ट के संशोधनों की मुखालफत शामिल है।
67 हजार पदों के लिए शुरू हुई आरक्षण प्रक्रिया
शासन ने मंगलवार से 12 जिलों के करीब 67 हजार पदों के लिए आरक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी है। शासन स्तर पर जिला पंचायत के अध्यक्षों का आरक्षण तय किया जाएगा, जबकि क्षेत्र और ग्राम पंचायतों का आरक्षण जिले स्तर पर तय होगा। पंचायतीराज संशोधन एक्ट 2019 के अनुसार निर्वाचन में आरक्षण को लेकर अब नई नियमावली फिलहाल नहीं बनाई जा रही है। न्याय विभाग के परामर्श के बाद शासन ने अब पुरानी नियमावली के आधार पर ही कार्रवाई का निर्णय लिया है। प्रभारी सचिव पंचायतीराज डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा के अनुसार, सभी जिलाधिकारियों को आरक्षण तय करने के संबंध में पत्र भेजे जा चुके हैं। वहां पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बारह जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत के पद, कहां कितने
- 55610 सदस्य ग्राम पंचायत के पद हैं
- 7491 ग्राम प्रधान के पद हैं, इतने ही उपप्रधान भी चुने जाएंगे
- 2988 क्षेत्र पंचायत के सदस्यों के पद हैं
- 89 क्षेत्र पंचायत प्रमुख हैं, इतने ही ज्येष्ठ-कनिष्ठ प्रमुख हैं
- 12 जिला पंचायत अध्यक्ष हैं और इतने ही उपाध्यक्ष हैं
- 357 जिला पंचायत सदस्यों के पद
कानूनी लड़ाई की तैयारी हुई तेज
संशोधन एक्ट में की गई व्यवस्था के विरोध के लिए कानूनी लड़ाई का माहौल भी बनने लगा है। दरअसल, दो बच्चों की शर्त को लागू करते हुए 300 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म कर दिया गया है। इससे एक झटके में हजारों लोगों की दावेदारी खटाई में पड़ गई है। इसके अलावा, शैक्षिक योग्यता भी कइयों की दावेदारी में अड़चन बन गई है। इन स्थितियों के अलग पंचायत जनाधिकार संगठन बडे़ फलक पर इस लड़ाई को ले जाने की तैयारी में है। संगठन के संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने नैनीताल में डेरा डाल दिया है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द इस मामले में याचिका दायर की जा रही है। बिष्ट के अनुसार, उनका संगठन संशोधन एक्ट की व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि जो खामियां हैं, उनमें सुधार चाहता है। हर मंच पर जाकर खामियों को उठाया गया है, लेकिन न्याय न मिलने पर अब कानूनी लड़ाई ही एकमात्र विकल्प बचा है।
पंचायत चुनाव जल्द से जल्द कराने के लिए सरकार प्रतिबद्घ है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, सरकार के स्तर पर तैयारी की जा रही है। सीएम के साथ मेरी तीन या चार अगस्त को बैठक होने जा रही है, जिसमें पंचायत चुनाव को लेकर अहम चर्चा होगी। पंचायत राज संशोधन एक्ट 2019 में कई ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जो कि व्यवस्था सुधार के लिहाज से दूरगामी साबित होंगी।
-अरविंद पांडेय, पंचायती राज मंत्री