दूसरे दिन कांग्रेस ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को मुद्दा बनाया। इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत विधानसभा कूच को निकले। हालांकि सरकार के सदन में आश्वासन के बाद विपक्ष शांत हो गया। इस बीच निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार ने श्राइन बोर्ड गठन का विरोध किया।
वहीं, बाहर चल रहे तीर्थ पुरोहितों के प्रदर्शन में केदारनाथ से कांग्रेस विधायक मनोज रावत सक्रिय दिखे। ऐसे में मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने श्राइन बोर्ड गठन को लेकर निर्णय लिए तो विपक्ष आक्रामक हुआ और रणनीति बदली। कांग्रेस ने कार्यमंत्रणा की बैठक में लाए बिना श्राइन प्रबंधन विधेयक को सदन के पटल पर रखने के बाद अपने तेवर कड़े कर लिए।
विपक्ष ने विधेयक से तीर्थ पुरोहितों और अन्य हक हकूकधारियों के हित प्रभावित होने को लेकर वेल में उतरने से लेकर धरना देने और वॉकआउट तक का दांव चला। पार्टी सड़कों पर तीर्थ पुरोहितों के समर्थन में उतर आई, लेकिन सत्ता पक्ष भी डटा रहा। आखिरी दिन विपक्ष के भारी विरोध के बीच सरकार ने श्राइन बोर्ड विधेयक का नाम परिवर्तित कर उसे पास करवा लिया। सत्र समाप्त होने के बाद कांग्रेस बोर्ड गठन के मुद्दे का सड़कों पर उतर कर विरोध करने की रणनीति बना रही है।
अपनों ने किया मंत्रियों को असहज
विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के सदस्यों ने ट्रेजरी बेंच को असहज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रश्नकाल में बिना तैयारी के पहुंचे मंत्री भाजपा विधायकों के निशाने पर रहे। ट्रेजरी बेंच ने पिछले सत्रों से भी कोई सबक नहीं लिया। अधिकांश मंत्री सदस्यों के अनुपूरक सवालों पर घिरते दिखे।
काम के निकले ‘कामचलाऊ’ संसदीय कार्यमंत्री
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शीतकालीन सत्र में बतौर संसदीय कार्यमंत्री की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को दी। कौशिक ने सदन में दी जिम्मेदारी को मजाक में कामचलाऊ व्यवस्था बताया, लेकिन वे कई विषयों पर विपक्ष पर पलटवार कर उसे शांत करवाने में सफल रहे। ट्रेजरी बेंच के साथी जब भी विपक्ष से घिरे कौशिक उनके पक्ष में खड़े दिखे।