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उत्तराखंडः फर्जी वसीयत बनाने के मामले में यूपी के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश समेत नौ को सजा

Tue, 03 Mar 2020 04:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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10 करोड़ की संपत्ति की फर्जी वसीयत बनाकर 32 एकड़ जमीन अपने नाम करवाने के मामले में यूपी सरकार के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश समेत नौ आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट/ सीविल जज सीनियर डिवीजन छवि बंसल ने दोषी करार देते हुए मंगलवार को सजा सुनाई। पूर्व मंत्री को पांच साल की सजा होने पर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है, जबकि अन्य आठ आरोपियों को एक से तीन साल की सजा होने पर अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया है। सभी दोषियों पर कुल आठ हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।  

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अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2014 के उक्त मामले में यूपी के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह, उनकी पत्नी पूर्व ब्लॉक प्रमुख सितारगंज मंजुलता, पुत्र शिववर्धन व पुत्रवधू निधि सिंह समेत पूर्व शासकीय अधिवक्ता स्वतंत्र बहादुर सिंह, उनकी पत्नी गीता सिंह, पुत्रवधू शिखा सिंह और वसीयत गवाह नवनाथ तिवारी व प्रेम नारायण सिंह को न्यायालय ने दोषी पाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से संयुक्त निदेशक विधि भूपेंद्र सिंह जंगपांगी, सहायक अभियोजन अधिकारी नितिन मोहन, आनंद सिंह सोलंकी व सिद्धार्थ श्रीवास्वत ने पैरवी करते हुए 20 गवाहों को न्यायालय में पेश किया।

मामले के अनुसार आजाद हिंद फौज के सिपाही रामअवध सिंह आजादी के बाद पुलिस में भर्ती हुए और डिप्टी एसपी के पद से रिटायर हुए थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को देखते हुए तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें कृषि कार्य के लिए ऊधमसिंह नगर जिले के बागवाला गांव में 50 एकड़ भूमि आवंटित की थी। रामअवध की एकमात्र संतान उनकी पुत्री प्रभावती देवी थी। 10 जून 1999 को रामअवध की मृत्यु के बाद प्रभावती ही चल-अचल संपत्ति की उत्तराधिकारी बनी। लिहाजा यह भूमि विरासतन चकबंदी न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन उनके नाम दर्ज हुई। प्रभावती की शादी आजमगढ़ की तहसील बूढनपुर के सिहौरा गांव में हुई। इसलिए वह यहां नहीं आ सकी।
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ऐसे में फर्जी वसीयतनामा तैयार कर उक्त 32 एकड़ जमीन को उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह ने अपने नाम करा लिया। पता लगने के बाद प्रभावती ने कई जगह शिकायती पत्र दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद पूरा मामला डीआईजी के पास पहुंचा था। तीन मई 2014 को डीआईजी के आदेश पर मामले में आईपीसी  की धारा 420, 467, 468, 471, 506, 504 में मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमे में प्रेम प्रकाश समेत नौ लोगों को नामजद किया गया। 17 जून 2016 को इस मुकदमे की चार्जशीट धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506, 342 व 120 बी में पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की थी। तब से लेकर मामला कोर्ट में चल रहा था। मंगलवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज सीनियर डिवीजन ने सभी नौ लोगों को दोषी पाते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। 

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पूर्व मंत्री और अन्य लोगों को इन धारां में हुई इतनी सजा 

नाम                                  धारा     -     सजा   -      जुर्माना 
प्रेम प्रकाश सिंह  -                 120बी   -   दो साल  -    पांच सौ रुपये   
                                         420   -  पांच साल -   एक हजार रुपये
                                          471     -  पांच साल -   एक हजार रुपये
                                         504     -  एक साल  -   पांच सौ रुपये
                                          506   -  दो साल    -   पांच सौ रुपये 
नवनाथ तिवारी, प्रेम नारायण -  120बी   -  दो साल    -  पांच सौ रुपये     
                                           420       - दो साल     - एक हजार रुपये 
                                           471    - तीन साल   - पांच सौ रुपये 
शिववर्धन सिंह -                    120बी    - दो साल     -   पांच सौ रुपये 
                                           420      - तीन साल   -  पांच सौ रुपये 
मंजुलता, निधि, गीता व शिखा-   120बी   - एक साल   -    पांच सौ रुपये 
                                             420   - एक साल   -   पांच सौ रुपये 
स्वतंत्र बहादुर सिंह                    120 बी    - दो साल     -  पांच सौ रुपये
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रामअवध की एकमात्र संतान उनकी पुत्री प्रभावती

रामअवध की एकमात्र संतान उनकी पुत्री प्रभावती देवी थीं। 10 जून 1999 को रामअवध की मृत्यु के बाद प्रभावती ही चल-अचल संपत्ति की उत्तराधिकारी थी। लिहाजा यह भूमि विरासतन चकबंदी न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन उनके नाम दर्ज हुई। प्रभावती की शादी आजमगढ़ की तहसील बूढ़नपुर के सिहौरा गांव में हुई थी। इसलिए वह यहां नहीं आ सकी। ऐसे में फर्जी वसीयतनामा तैयार कर उक्त जमीन को उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह ने अपने नाम करा लिया।

पता लगने के बाद प्रभावती ने कई जगह शिकायती पत्र दिए, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद पूरा मामला डीआईजी के पास पहुंचा था। तीन मई 2014 को डीआईजी के आदेश पर धारा 420, 467, 468, 471, 506, 504 आईपीसी में प्रभावती की ओर से मुकदमा दर्ज किया गया।

इस मुकदमे में प्रेम प्रकाश समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 17 जून 2016 को इस मुकदमे की चार्जशीट धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506, 342 व 120 बी में पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की थी। तब से लेकर मामला कोर्ट में चल रहा था। आज सिविल जज सीनियर डिवीजन ने दोषी करार देते हुए सभी को अलग-अलग सजा सुनाई।
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