नाम धारा - सजा - जुर्माना
प्रेम प्रकाश सिंह - 120बी - दो साल - पांच सौ रुपये
420 - पांच साल - एक हजार रुपये
471 - पांच साल - एक हजार रुपये
504 - एक साल - पांच सौ रुपये
506 - दो साल - पांच सौ रुपये
नवनाथ तिवारी, प्रेम नारायण - 120बी - दो साल - पांच सौ रुपये
420 - दो साल - एक हजार रुपये
471 - तीन साल - पांच सौ रुपये
शिववर्धन सिंह - 120बी - दो साल - पांच सौ रुपये
420 - तीन साल - पांच सौ रुपये
मंजुलता, निधि, गीता व शिखा- 120बी - एक साल - पांच सौ रुपये
420 - एक साल - पांच सौ रुपये
स्वतंत्र बहादुर सिंह 120 बी - दो साल - पांच सौ रुपये
रामअवध की एकमात्र संतान उनकी पुत्री प्रभावती देवी थीं। 10 जून 1999 को रामअवध की मृत्यु के बाद प्रभावती ही चल-अचल संपत्ति की उत्तराधिकारी थी। लिहाजा यह भूमि विरासतन चकबंदी न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन उनके नाम दर्ज हुई। प्रभावती की शादी आजमगढ़ की तहसील बूढ़नपुर के सिहौरा गांव में हुई थी। इसलिए वह यहां नहीं आ सकी। ऐसे में फर्जी वसीयतनामा तैयार कर उक्त जमीन को उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह ने अपने नाम करा लिया।
पता लगने के बाद प्रभावती ने कई जगह शिकायती पत्र दिए, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद पूरा मामला डीआईजी के पास पहुंचा था। तीन मई 2014 को डीआईजी के आदेश पर धारा 420, 467, 468, 471, 506, 504 आईपीसी में प्रभावती की ओर से मुकदमा दर्ज किया गया।
इस मुकदमे में प्रेम प्रकाश समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 17 जून 2016 को इस मुकदमे की चार्जशीट धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506, 342 व 120 बी में पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की थी। तब से लेकर मामला कोर्ट में चल रहा था। आज सिविल जज सीनियर डिवीजन ने दोषी करार देते हुए सभी को अलग-अलग सजा सुनाई।