उम्मीदवारों का चयन आसान नहीं
इसके विपरीत अनुभवी दावेदारों के अपने पक्ष में अलग तर्क हैं। उनका कहना है कि युवाओं के पास चुनाव लड़ने के आगे कई अवसर हैं। लेकिन उम्र अधिक होने की वजह से उनके पास चुनाव लड़ने के अवसर बेहद सीमित हैं। दलों में लंबे समय तक सक्रिय रह कर जनता से जुड़ने का अनुभव उनके पास युवाओं से अधिक है। इसलिए टिकट की उनकी दावेदारी युवाओं से ज्यादा मजबूत बनती है।
रायशुमारी से नामों का पैनल तैयार करने वाले भाजपा के पर्यवेक्षक हो या कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य सभी के सामने टिकट के दावेदारों के ये कॉमन तर्क सामने आए हैं। ऐसे में उम्मीदवारों का चयन उनके लिए आसान नहीं है। इसलिए आखिरी मुहर लगाने के लिए जनता के बीच सर्वे कराने की तरकीब खोज ली गई है।
टिकट के लिए युवा, बुजुर्ग, पुरुष, महिला सभी दावेदारी करते हैं। लेकिन टिकट का आधार क्षेत्र में छवि, अनुभव, जीतने की संभावना और पार्टी कार्यकर्ताओं की सहमति होती है। उम्र मायने नहीं रखती। -आदित्य कोठारी, प्रदेश महामंत्री, भाजपा
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टिकट देते समय हम यह देखेंगे कि दावेदार ने कितनी सक्रियता से योगदान दिया। सिर्फ युवाओं या सयाने नेताओं को टिकट देंगे, ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम उन युवाओं, महिलाओं, अनुभवी नेताओं को उम्मीदवार बनाएंगे जिनकी क्षेत्र में अच्छी छवि है। -करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस