2018 में भाजपा का पलड़ा था भारी
2018 में राज्य में 84 निकायों में चुनाव हुआ था। इनमें मेयर, चेयरमैन के 34 पदों पर भाजपा, 25 पदों पर कांग्रेस, एक पद पर बसपा और 24 पदों पर निर्दलीय जीते थे। पूर्व के चुनाव के मुकाबले इन पदों पर भाजपा को 12, कांग्रेस को पांच सीटों का फायदा हुआ था। वार्ड सदस्यों में भाजपा को 323, कांग्रेस को 182, बसपा को चार, आप को दो, सपा को एक, यूकेडी को एक और निर्दलीयों को 551 सीटों पर जीत मिली थी। इनमें भाजपा के 143 वार्ड मेंबर, जबकि कांग्रेस के 47 बढ़े थे। 374 निर्दलीय बढ़े थे। इस लिहाज से देखें तो 2018 निकाय चुनावों में भाजपा का पलड़ा भारी था। राज्य में भाजपा की ही सरकार भी थी।
इस बार क्या हैं समीकरण
राज्य में भाजपा की लगातार दूसरी सरकार है। लोकसभा में भाजपा को पांचों सीटों पर जीत तो मिली है, लेकिन 2019 के मुकाबले पांच प्रतिशत वोट बैंक भी खिसक गया है। ऐसे में चुनौती कम नजर नहीं आ रही। हालांकि, भाजपा ने निकायों के स्तर पर चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। उधर, कांग्रेस का दावा है कि इस बार निकाय चुनाव में उनकी पार्टी बंपर जीत दर्ज करने जा रही है।