हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। निकाय चुनाव को लेकर पूर्व में राज्य निर्वाचन आयोग ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अब हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से ही पूछ लिया कि वह बताए कि वह स्वतंत्र संस्था है या सरकार का अंग।
मोहम्मद उमर की याचिका पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने सुनवाई की। याची का कहना था कि सरकार निकाय चुनाव नहीं करा रही है। सरकार ने छह माह के लिये प्रशासकों की नियुक्ति की है। इनका कार्यकाल भी दो नवंबर को खत्म हो रहा है। दो नवंबर तक या तो सरकार चुनाव करवाए या फिर चुने हुए जनप्रतिनिधियों को ही कार्य करने दिया जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा कि आयोग स्वतंत्र संस्था है या सरकार का अंग। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि निकाय चुनाव कराना आयोग की संवैधानिक बाध्यता है, लेकिन अधिसूचना सरकार ही जारी करेगी। आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। पीठ ने सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
प्रदेश में तीन मई से पहले राज्य में निकाय चुनाव होने थे। सरकार की ओर से हो रही देरी को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। राज्य निर्वाचन आयोग ने 28 अप्रैल तक चुनाव कराने के लिये कार्यक्रम सरकार को सौंप दिया था मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई और दो मई को सरकार ने प्रशासकों की नियुक्ति कर दी। हाईकोर्ट में सरकार ने जून माह में चुनाव कार्यक्रम तय करने के साथ जुलाई में चुनाव करने की बात की तो याचिका को हाईकोर्ट ने निस्तारित किया था।