पूर्व त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यमकेश्वर क्षेत्र के फल्दाकोट मल्ला में देश के पहले भांग से निर्मित भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भांग केवल पौधा नहीं एक कल्पवृक्ष है। उन्होंने कहा कि आज भांग से 550 से अधिक उत्पाद बनाए जा रहे हैं। कैंसर से लेकर असहाय दर्द के इलाज में भांग का प्रयोग हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े उद्योगों की कल्पना करना बेमानी है। कुटीर उद्योग पहाड़ में स्वरोजगार योजना को धरातल पर उतारते का सबसे कारगार विकल्प है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बाजार मुहैया कराने के साथ लोगों में सहकारिता के संस्कार को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
यमकेश्वर के फलदाकोट मल्ला में भांग से निर्मित भवन को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वरोजगार का सबसे बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा यह एक औषधीय कुटिया है। आज दवाओं, आभूषण, कपड़े, इत्र और ईंट आदि उत्पादों को बनाने में भांग का प्रयोग हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सकीय अनुसंधान के मुताबिक भांग कैंसर के इलाज में भी काफी उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भांग की प्रोटेक्टिव फार्मिंग की जरूरत है, जिससे ब्रीड का संरक्षित रख शुद्ध उत्पाद बनाए जा सकें। उन्होंने कहा कि संभ्रात वर्ग आज हस्तनिर्मित और जैविक उत्पादों को तवज्जों दे रहा है। यूरोप इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।