सात फरवरी सुबह करीब साढ़े नौ बजे आई आपदा के बाद से तपोवन जल विद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने में एक हजार से अधिक बचाव कर्मियों के साथ कई अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं। इसके बाद भी आपदा की भयावता के आगे सारे इंतजाम नाकाफी लग रहे हैं। सुरंग के अंदर की विकट परिस्थिति के चलते 80 घंटे बाद भी अभी तक टनल में लापता लोगों का पता नहीं चल सका है। हर किसी की आस है कि इससे पहले की सुरंग में फंसे लोगों की सांस टूटे, उन तक जीवनरक्षक पहुंच जाएं।
आपदा के 80 घंटे बाद भी सुरंग के अंदर करीब 150 मीटर तक ही मलबा हटाया जा सका है, जबकि सुरंग करीब तीन किमी लंबी है। मलबा कहां तक गया है यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। पूरे बचाव दल का फोकस तपोवन की सुरंग पर ही है। एनडीआरएफ की ओर से सुरंग के अंदर ड्रोन कैमरा भी भेजा गया, लेकिन फंसे लोगों का कुछ पता नहीं लग पाया है।
बचाव कर्मियों के जोश और कार्य करने की क्षमता में कोई कमी नहीं आई है। वह पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं, लेकिन सुरंग के अंदर एक बार में एक ही मशीन जा पा रही है जो अंदर से गाद को उठाकर बाहर ला रही है, जिसमें काफी समय लग रहा है। इसी हर कोई कामना कर रहा है कि अंदर फंसे लोग सुरक्षित हों। आईटीबीपी का कहना है कि बचाव का काम टनल के आखिरी छोर तक चलेगा।
बचावदल
एसडीआरएफ 100
एनडीआरएफ 176
आईटीबीपी 425
एसएसबी एक टीम
आर्मी 124 (नेवी-16जवान, एयरफोर्स-दो जवान व तीन हेलीकॉप्टर)
फायर विभाग 16 जवान
राजस्व विभाग 20 कर्मी
सिविल पुलिस 26 कर्मी
दूरसंचार 07 कर्मी
बीआरओ 150 मजदूर, दो जेसीबी, एक व्हील लोडर, दो हाइड्रो एक्सकैवेटर।
- आर्मी मेडिकल की दो टीमें व दो एंबुलेंस
- स्वास्थ्य विभाग की चार मेडिकल टीम, चार एंबुलेंस, पांच 108 वाहन।
रिजर्व में...
आईटीबीपी - 400 जवान
आर्मी - 220 जवान
फायर विभाग - 39 जवान
आर्मी चौपर तीन (जोशीमठ में)
स्वास्थ्य विभाग चार मेडिकल टीम, पांच एंबुलेंस