प्रदेश के हर थाने में महिला हेल्प डेस्क अब रिसेप्शन सेंटर की तरह काम करेंगी। यहां शिकायतों को रिसिविंग भी दी जाएगी। डेस्क पर एक रजिस्टर भी तैयार किया जाएगा, जिसकी हर 15वें और 30वें दिन अधिकारी समीक्षा करेंगे।
शनिवार को डीजीपी अशोक कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि उनकी शिकायतें थानों में रिसिव नहीं की जाती हैं। ऐसे में उन्हें फिर उच्चाधिकारियों के दफ्तरों और फिर कोर्ट में भी चक्कर लगाने पड़ते हैं। लेकिन, अब इस व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
थानों में हेड मोहर्रिर या मुंशी के पास बहुत से काम होते हैं। ऐसे में अब यह जिम्मेदारी महिला हेल्प डेस्क को दी जा रही है। यह डेस्क अब रिसेप्शन सेंटर की तरह काम करेंगी। यहां तैनात कर्मचारी करुण स्वभाव वाले होंगे और पीड़ित व दिव्यांग के प्रति संवेदनशील व्यवहार करेंगे।
यदि कोई पीड़ित अपने साथ प्रार्थनापत्र नहीं लाया है तो उसे शिकायत लिखने के लिए स्टेनशनरी भी उपलब्ध कराई जाएगी। महिला हेल्प डेस्क प्रतिदिन प्राप्त होने वाले शिकायती प्रार्थनापत्र को एक रजिस्टर में दर्ज करेगी। इसका 15 दिन में सीओ, 30 दिन में पुलिस अधीक्षक और आकस्मिक रूप या तीन माह में पुलिस कप्तान समीक्षा करेगी।
महीने में एक सप्ताह कोटद्वार में कैंप करे एसएसपी, डीजीपी को भेजा ज्ञापन
एसएसपी पौड़ी का महीने में एक सप्ताह कोटद्वार में कैंप लगाने की मांग को लेकर युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव प्रवेश रावत ने डीजीपी को ज्ञापन भेजा। कहा कि कोटद्वार यूपी बार्डर से सटा संवेदनशील क्षेत्र हैं। यहां पुलिस की प्राथमिकता कानून व्यवस्था से कहीं अधिक चौराहों पर वाहनों के चालान तक सिमट गई है।
हा कि वाहन चेकिंग के नाम पर महिलाओं, बुजुर्गों और छात्र-छात्राओं को परेशान किया जा रहा है, जबकि अपराधी बेखौफ होकर गैरकानूनी धंधों में लगे हैं। उन्होंने चोरी, टप्पेबाजी और नशे के धंधे पर अंकुश लगाने की मांग की है। कहा कि एसएसपी के माह में एक सप्ताह कैंप लगने से स्थितियों में सुधार आएगा।