जंगलों में आग लगने से वातावरण में धुंध छा गई है। दृश्यता पांच सौ मीटर रह गई है, जिसके चलते हिमालय भी नजरों से ओझल हो गया है। बारिश न होने से नवंबर से ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई थीं। फायर सीजन शुरू होने के बाद तापमान बढ़ने से आग लगने में और अधिक बढ़ोतरी हो गई है। चीड़ के जंगल सूखे पिरूल के कारण सुलग रहे हैं।
आग के कारण जहां एक ओर वन्य संपदा को नुकसान पहुंच रहा है वहीं पर्यावरण को भी भारी क्षति हुई है। पूरा वातावरण धुंध से भर गया है। पांच दिन पूर्व हल्की बारिश होने से धुंध में कुछ कमी आई थी लेकिन एक बार फिर से दृश्यता कम हो गई है। पहाड़ियां नजरों से ओझल हैं। मुनस्यारी, चौकोड़ी आदि दर्शनीय स्थलों से हिमालय भी नजर नहीं आ रहा है। इसके चलते पर्यटक भी मायूस हैं।
चंपावत जिला मुख्यालय में धुंध और धुएं का आलम यह है कि सौ मीटर की दूरी तक भी लोगों को साफ नहीं दिखाई दे रहा है। धुएं के कारण सांस संबंधी रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।