उत्तराखंड व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के उप कप्तान धन सिंह कोरंगा वर्तमान में मुफलिसी की जिंदगी गुजारते हुए चार हजार रुपये में परिवार का भरण पोषण करने को मजबूर हैं। उनकी सरकार से बस यही गुजारिश है कि उनकी योग्यता के अनुसार कहीं नौकरी लग जाए। उन्होंने बताया कि टीम में शामिल खिलाड़ियों में से कोई फल बेच रहा है तो कोई ई-रिक्शा चलाकर पेट पाल रहा है।
धन सिंह का आरोप है कि राज्य में खेल विभाग की ओर से दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं मिल रही है। इस वजह से दिव्यांग खिलाड़ी परेशान हैं। शांतिपुरी निवासी धन सिंह कोरंगा ने बचपन में साइकिल के टायर पंचर की दुकान में काम करके स्कूल की पढ़ाई की। स्कूल की पढ़ाई कर हल्द्वानी आईटीआई कॉलेज से उन्होंने आईटीआई की।
बचपन से क्रिकेट खेलना पसंद था तो अप्रैल 2018 में रुद्रपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर त्रिकोणीय क्रिकेट प्रतियोगिता से उनके क्रिकेट कॅरिअर की शुरूआत हो गई। अच्छे प्रदर्शन पर जल्द ही उन्हें उत्तराखंड व्हीलचेयर क्रिकेट टीम का उप कप्तान बना दिया गया। उन्होंने बताया कि दिव्यांग खिलाड़ियों की वर्तमान स्थिति काफी खराब है। टीम के जवाहर नगर निवासी सुबोध कुमार ई-रिक्शा चला रहे हैं, जबकि खटीमा के अनीस अहमद फल बेच रहे हैं।
खेल व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने भी नहीं की मदद
वर्तमान में परिवार पालने के लिए प्राइवेट डेयरी में दूध कलेक्शन का काम कर रहे। धन सिंह ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने मदद का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक मदद मिली नहीं। धन सिंह कहते हैं कि उन्हें धन का लालच नहीं है, लेकिन योग्यतानुसार अगर संविदा पर सरकार नौकरी दे दे तो वह करने के लिए तैयार हैं। परिवार में उनके पिता, पत्नी व दो बच्चे हैं।