जहां पर बाघ को टक्कर लगने की बात कही जा रही है, उस इलाके में बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की आवाजाही रिपोर्ट हुई है। फतेहपुर रेंज के आरओ ख्याली राम आर्या ने बताया कि जो बाघ मरा है, उसे भी आसपास के जंगल में कई बार देखा गया था। इस इलाके में हाथी समेत अन्य वन्यजीवों की भी आवाजाही है। वनाधिकारियों के अनुसार, फतेहपुर-गदगदिया कॉरिडोर है, जिस पर वन्यजीवों का आवागमन लगातार रहा हैं।
पिछले साल छह बाघों ने तोड़ा दम
राज्य में पिछले साल कई बाघों ने दम तोड़ा था। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी (डब्लूपीएसआई) के प्रोग्राम मैनेजर जोजफ टीटो के अनुसार पिछले साल उत्तराखंड में छह बाघों ने दम तोड़ा था। इनमें पौड़ी जिले में एक बाघ की मौत दुर्घटना में हुई थी।
एक की मौत आपसी संघर्ष और चार की मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया था। आखिरी घटना तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले पीपल पड़ाव रेंज में हुई थी। फतेहपुर रेंज में ही अप्रैल-2020 में एक बाघ का शव मिला था। इस साल की बाघ की मौत की पहली घटना है।
कई वन्यजीवों की हो चुकी मौत
कुछ दिनों के अंदर कई वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। इसमें एक हाथी और एक बाघ की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई है। तराई पूर्वी वन प्रभाग के अंतर्गत गौला रेंज में 21 दिसंबर को करंट लगने से हाथी की मौत हो गई थी। डब्लपीएसआई के अनुसार 26 दिसंबर को पीपलपड़ाव रेंज में एक बाघिन का शव मिला था।